• pragatisheel_sadhak_bihari 27w

    आरक्षण

    यह कैसा चढ़ा...........तुम पर द्वेष घृणा का खुमार है,
    देश हित भांड में....सब कर रहे हिंसा का कारोबार हैं!

    सड़कों पे तांडव करते...निरक्षरों को देखा आज हमने,
    मिले हुए थे चंद अल्पसंख्यक....जो भारत के गद्दार हैं!

    दौड़ा कर खदेड़ रहे थे...साईकल पे चलने वाले को भी,
    फिर कैसे कह रहे थे......वो गरीबों के ही महज यार हैं!

    मूकदर्शक बनी पुलिस........सारा तमाशा देख रही थी,
    हालात न बिगड़े.........उन्हें दंगा फसाद का जो डर है!

    घर से निकले थे.....नया वितीय वर्ष का आगाज करने,
    पर आज तो कफ़न था करीब,मुर्गी सी कीमत लिए जो अब हर नर है!

    गली गली छुप कर भागते फिर रहे थे,,शहर में हर जन,
    एहसास था....आज निरक्षरों को मिला सरकारी वर है!

    डंडे बरसाते.........लोगों को गालियां देते दिखा हुजूम,
    मानो भीमराव का वो ही सिर्फ पौत्र....भारत उनका ही सिर्फ घर है!
    ©gatisheel_sadhak_bihari