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    मेरी कलम

    तेरी कहानी तेरी जुबानी,
    कलम तेरी यही कहानी।
    न कोई शर्म न कोई दया,
    कर देती है सब कुछ बया।

    तू लिखती है जन्मो की कहानी,
    बदल देती है उस की वाणी।
    दिखती हैं तू बिल्कुल सादी,
    करती है तू बहुत मन मानी।

    न किसी से दोस्ती न कोई दुश्मनी,
    सबके हाथो में तू एक सी सजती।
    करती शृंगार बनाती शब्दावली,
    कलम तेरी यही कहानी।

    तू ही मेरी सच्ची साथी,
    तू ही मेरी है प्रेमी,
    बे झिझक हर बात मैं तुझसे कह जाता मेरी सहेली।

    तू ही तो कागज़ को रंग देती है,
    तू ही लोगो की कमी भर देती है।

    हर लेखक की है तूने मानी,
    लिख देती है तू उसकी जबानी।
    मन कि बात होटो पर आती,
    तेरे संग हाथ से सजाती।

    रूखे सूखे तू तार जोड़ती,
    रिश्तों की बुनियाद जोड़ती,
    मिलाती दूर बेटे किसी अपने को,
    आँसू से खुशियो का प्यार बाटती।

    तू ना होती तो मेरे गम कौन बाटता
    तू ना होती तो मेरी खुशी कौन बढ़ाता
    तू ही मेरी सुख दुख की साथी है
    ऐ कलम , तू ही मेरी असि है।

    By:Himmat and Nikita
    ©nikki_ns1