• ashutosh_bharti 23w

    माँ

    सब बोले, तेरे बारे में कुछ लिखूं माँ,
    तेरा ये आशिर्वाद है जिसका कर्ज कभी ना उतार पाऊँ मैं,
    लेकिन तेरी शख्सियत को शब्दों में कैसे तौलू मैं,

    मुझे ऐसा बनाने में तूने कितनी पीड़ा सही है,
    उसे महसूस नहीं कर सकता हूँ मैं,
    तो फिर तेरी शख्सियत को शब्दों में कैसे तौल सकता हूँ मैं,

    मेरे हर शैतानियों को नज़रअंदाज़ कर देती थी,
    कुछ कहे बिना ही मेरे मनपसन्द के खानें बना देती थी तू,
    बोल, कैसे तेरी शख्सियत को शब्दों में तौल दूं मैं,

    कभी तौल ही नहीं सकता मैं तेरी शख्सियत को शब्दों मे,
    बस उस ईश्वर को धन्यवाद दे सकता हूँ,
    और दुआएं करता हूँ कि तू हमेशा साथ रहे मेरे...

    ~आशुतोष भारती