• theshekharshukla 3w

    यह अटल सत्य है, मृत्यु से बचा जा सकता है लेकिन जब तक आत्मा शरीर में रहना चाहे तब तक ही, उसके बाद जीवन काल महज़ ब्रैकेट में जन्म वर्ष और मृत्यु वर्ष तक ही सिमित रह जाता है।

    इस त्रिवेणी के मूल में इसी सत्य को प्रदर्शित करा गया है, जीने के सलीके भी काम नहीं आते जब मौत आती है अंतिम पैग़ाम ले कर।

    लेकिन हमें चाहिए मौत से डर बैठ न जाए, क्योंकि दुनिया में आना और बिना कुछ करे चले जाना, कायरों और निक्कमों की निशानी है।

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    त्रिवेणी

    जीने का सलीका बारीक़ी से सीखते रहे उम्र भर,
    मौत से डरते नहीं थे फ़िर भी मौत को मात देते रहे।
    जीवन तो क्षण भर का है, मौत उम्र भर रह जाती है।
    ©theshekharshukla