• vivekyadav6365 5w

    रूठती हैं कभी ,कभी बस देख मुस्कुराती हैं,
    बचपन की यादो को ,गठरी में बाँध सो जाती है ,
    हर रिश्ते ने खोज डाली कमियां मुझमें,
    बस इक रिश्ते ने मुझे सम्पूर्ण समझा हैं ।


    मैं मिलता नही बरसो तक माँ से ,
    दरवाजे पर एक बुढा सख्श रहता हैं ,
    घर में आती हैं हज़ारो नामो से चिठ्ठीया,
    उन लफ्ज़ो पे बस मेरा नाम रहता हैं ।

    कैसे निश्छल सा प्यार इतने लंबे वक़्त कर सकती हैं
    वो,आश्चर्य होता हैं ,
    सबसे ज्यादा मुझे बदलते उसी ने देखा हैं ।
    ©vivekyadav6365