• dr_pradeep_sehgal 5w

    नीड़

    उग आई हैं पाँखें ...
    अँधेरे की...
    उस वृक्ष को...
    बियावान में--
    निगलने के लिए...
    उड़ कर उन पाँखों से...
    अँधेरा ...
    आ बैठेगा उस वृक्ष पर...
    ग्रास बनाने के लिए...!
    डूब जायेगा वह वृक्ष --
    उस अँधेरे में...
    खबर न होगी...
    बियावान को भी...
    घोर सन्नाटे में--
    उस वृक्ष की गौरिया फिर..
    अपने नन्हें पाँखों से--
    दे देगी मात लेकिन...
    अपने हौसलों की उड़ान से...
    वक्त को !!


    ©dr_pradeep_sehgal