• writerrai 15w

    ©writerRai

    इन दरख़्तो का मिजाज जब जब मैने बदलता देखा है ,
    तब तब उन शाखों पर हर एक पत्ता मचलता देखा है ।।
    जिस पहर उस हवा का रुख दरख़्तो ने अपने हक़ में देखा है ,
    तब उस माटी ने दरख़्तो के लिए,
    बिना किसी शर्त उस हवा को रूख बदलते देखा है ।।

    उस माटी ने इन दरख़्तो को भी जाल बिछाते देखा है ,
    उस अकेली बयार को बड़े अच्छे से फंसाता देखा है ।।
    हर दरख़्त को माटी ने उस बयार को महसूस,
    करने के लिए बेचैन ‌देखा है ।।
    तभी पंछी ने मचलते पत्तों को और पत्तों से लड़ता देखा है ,

    ये बयार जो फ़राज़ है उसे हर दरख़्त से प्यार बेशुमार है ।।
    फिर भी लगता इन दरख़्तो को इस बयार को गुमान है ।।
    शायद यही होता हर प्यार का अंज़ाम है !!

    दरख़्त - Tree, बयार - Air, फ़राज़ - Height, गुमान - Vanity

    @लेखकRai