• sarfirashayar 16w

    खुदा

    गर खुदा की इबादत-ए-परस्तिश दिलों में नहीं मूरत में है।
    तो माफ़ी चाहूँगा, उस मजहब का मैं काफ़िर ही सही।।
    ©sarfirashayar