• vikkaashh 37w

    तुम कहानी से चलके आती हो,
    मैं बचपन सा बन के सुनता हूँ ,
    तुम बहार में लिखी गजल सी हो,
    जिसे हरवक़्त मैं गुनगुनाता फिरता हूँ,
    मैं एक लावारिस कपड़ा सा,
    जिसे पहन के तू दुनिया घूमती हैं,
    मैं पतझड़ में उड़ता एक तिनका सा,
    जिसे तू अपनी पनाह में लेती हो,
    रुक जाऊं जो मैं कभी निराश होकर,
    हर बार तू हँसकर कहती हैं ,
    मैं हूँ तो तुम्हारे साथ ही ,
    और फिर से लेकर बढ़ती हो ,
    रिश्तों के मकड़जाल में जो कभी मैं उलझ सा जाता हु,
    तुम पीट - पीट के झुलसे को..फिर से उसे सुलझाती हो,
    अब कितनी बात बताये हम ,
    तुम्हें फिर से कैसे मनाये हम ,
    सुनो ऐक राज की बात बताता हूँ ,
    मैं प्यार तुम्हीं से करता हूँ,
    मैं प्यार तुम्हीं से करता हूँ l