• explorer_shashank 15w

    खत

    चाहता हूँ कि ये ख‍त
    एक इश्क से भरा प्याला हो
    और ये इश्क का प्याला
    इस बार ऐसे चढ़े जैसे
    ब‍ड़े इकमिनान से पूर्णिमा की रात को,
    चाँद अपने परवान में आता है।। 
    ये उस न‍शीले जाम कि त‍र‍ह हो 
    जिसका सुरूर ह‍ल्के्-ह‍ल्के
    अगले ख‍त तक बना रहे
    ये उस तपस्या के जैसे हो 
    जो साधु, स‍न्त, महात्मा,
    मोन्क सुकून से करते है।।

    हाँ मै चाहता हूँ कि उन्हे ख‍त लिखूँ
    और वो माटी कि खुश्बू सी उसमे घुल जाए।।
    ©dastaan_e_shayar