• innerthoughts_ 22w

    Miss you maa

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    17/04/14

    हर दिन की तरह उस दिन भी
    हरेक के चेहरे पर खिलखिलाहट थी
    ना कोई दुःख ना ही कोई गिला सिकवा
    खुशियों की बरसात थी
    रिश्तो का भी अजीब खेल हैं
    हल्की बारिश में भी जाने की जिद थी तेरी
    उस सन्नाटे में रात के अंधेरे में
    घर में बैठे मन मेरा बेचैन था
    पूरी जिंदगी एक पल में तबाह हो जाएगी
    ये मालूम न था
    यकीं न था किसी के बातो पर
    झूठला रही थी सभी के आँसूओ को
    मिनटो पहले ही आँखों के सामने थी
    अब तरस गई उनके एहसास के लिए भी
    मैं हूँ ना, पापा के शब्दों की वो ताकत
    पर दिल था कि मान ही नहीं रहा था
    ये डरावना सपना पीछे क्यो पड़ा हैं
    सालो से नींद मेरी खुली नहीं हैं
    काश ! रोक लेती तुझे उस दिन
    तो पास मेरे आज तु होती माँ

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