• pushkarm 22w

    अपनी ख़ामोशियों में मुझे अवाज़ दो
    अंधेरों में बढ़ कर मुझे अपना हाथ दो
    मेरे जो राज़ हैं सारे उन्हें तुम अल्फ़ाज़ दो
    मेरी चाहत को तुम मोहब्बत का नाम दो

    मेरी तमाम ज़िन्दगी के बदले एक शाम दो
    अपने ग़म को भुलाने का कुछ तो इंतेज़ाम दो
    इक़रार नहीं तो इलज़ाम दो
    मेरी चाहत को तुम मोहब्बत का नाम दो

    मेरे आँखों को ख्वाब दो
    मेरी हसरतों को परवान दो
    मेरी तन्हाईयों को कुछ तो काम दो
    मेरी चाहत को तुम मोहब्बत का नाम दो

    मेरे लबों को अपने नाम का कलाम दो
    मेरे लड़खड़ाते कदमों को ज़रा संभाल दो
    ख़ानाबदोश मेरे ख़यालो को कुछ तो आराम दो
    मेरी चाहत को तुम मोहब्बत का नाम दो

    ©pushkarm