• anne28 13w

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    हमारी सक्रीय सरकार से निवेदन है
    मज़हब की छोड़ के "इन्शानियत" को ध्यान में
    रखकर "अपरधियों" को सज़ा दे,
    ताकी अब और कोई "निर्भया" "ज़ैनब" "अशिफ़ा" "पायल"
    न बने����������

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    पहले वो इंसान थी!

    सब कहते हमरा देश तरक़्क़ी
    कर रहा है, कैसे ये तो दिख भी रहा है।
    जितनी तेज़ी से "अपराध" बढ़ रहा है,
    तरक़्क़ी ही तो है, तभी लोग तिंरगा
    ले कर अपराधी को बचाने निकल
    पड़ते है।

    मानो कोई बड़ा काम कर के देश
    का नाम रौशन करने आये हो।
    छोटी बच्चियों पे सियासत होती है
    जनाब, ये तरक़्क़ी ही तो है,"अपराध"की।

    जो बचाव में उतरते है, उनको धमकियां
    मिलती है,मार दिया जाता है,आवाज
    दबा दी जाती है,हुई ना तरक़्क़ी "अपराध"की।

    rape कयों हुआ ये सफ़ाई दिए जाता है,
    फिर rape को आंका जा सकता है , की क्यों
    हुआ ,मुस्लिम थी तो rape हुआ???

    अरे जानवरो!! वो बच्ची थी, इंसान थी,
    फिर वो किसी मज़हब की थी।
    पहले के "दो" सत्य कैसे अनदेखा कर सकते है तुम??
    किस मुँह से इंसान कहते है हम खुदको,
    और कितना गिरेंगे,सच कहा न
    तरक़्क़ी हुई है "अपराध" में।

    पर क्या इसलिए आज़ाद हुए हम;
    अपने पूर्वजों ने बलिदान दे कर
    हमारी भारत "माँ" को बचा लिया।
    अब हमारी जिम्मेदारी है, भारत माँ
    की "बेटियों" को "हैवानियत"
    से आजादी दिलाने की।

    rape जैसे जग्यनये अप्राद्ध को
    बर्दास्त कैसे कर सकते है हम??




    ©anne