• sanjayvyas 33w

    ~रात-2~

    हूबहू रातों में आये ख्वाब की तरह है वो,
    चंद पलो की मिली हुई खुशी की तरह है वो,
    आँख खुलते ही हक़ीक़त बाहें फैलाये बैठी है,
    अब तो पल भर की खुशी भी मुँह बनाये बैठी है।

    ~संजय व्यास