• anjana1 16w

    रात और दिन

    रात और दिन का फर्क अब महसूस होता नहीं
    रातों को जागते हैं और दिन में तारों को खोजते हैं
    खुशी और ग़म को मनाते नहीं
    उम्मीदों को संजोते नहीं
    फ़र्ज़ को फ़र्ज़ समझ, फ़र्ज़ निभाते हैं
    किस्सों को दोहराते नहीं
    ग़लत और सही का मापदंड करते नहीं
    सुन कर ,देख कर , बोल कर
    दिमाग की नसों पर वज़न
    डालते नहीं
    अच्छा है कोई फर्क महसूस करते नहीं
    रात और दिन यूं ही गुजर जाते हैं
    अंजना