• nehulatagarg 6w

    अजीब -अजीब तरह के ख्याल आते है और खौफनाक ख्वाब जिन्हें देखकर बहुत डर लगता है और दिल बैठा जाता है । मेन्शियां सब ठीक तो होंगे ना क्या करें ? हमसे तो अब रहा नहीं जा रहा और हमने सोच लिया है की , हम रूबैन के ससुराल जरूर जायेंगे और अब देर नहीं कर सकते तो आप ऐसा कीजिए यौमन से कहिये की , वो कल सुबह ही हमारे जाने का इंतजाम कर दें क्योंकि अब हमसे और नहीं रहा जा रहा यहाँ । आहन्ना उठकर जाने लगती है तो मेन्शियां परेशान हो जाती है और वो अच्छे से जानती थी की , आहन्ना रूकेगी नहीं लेकिन वो उस वक्त तो चुप रह जाती है लेकिन परेशान हो जाती है इस कशमकश से की , वो आहन्ना को बताये या ना बताये क्योंकि अबु और रूखसार ने सख्त हिदायत दी थी की , हम उन्हें कुछ भी ना बताये लेकिन कल जब वो जाने लगेगी तो हम क्या करेंगे ? सुबह जल्दी ही रात के आखिरी पहर से पहले ही आहन्ना मेन्शियां को जगाने पहुंचती है और मेन्शियां नींद में गाफिल रहती है और बार - बार झकझोरती हुयी उन्हें उठाने की कोशिश करती है लेकिन जब बात नहीं बनती तो पानी का जग लाकर उनके ऊपर उडेंल देती है लेकिन मेन्शिया फिर भी नहीं सहलती तो आहन्ना सरोता लेकर आ जाती है और मेन्शियां के कानों के पास ले जाकर उसके चलाने की आवाज करती है तो हडबडाकर मेन्शियां उठ बैठती है और आँखों को मसलती हुयी कहने लगती है - इतनी रात को आप हमें परेशान क्यों कर रहीं है सरकार जाकर सो जाइये और हमें भी सोने दीजिये तो आहन्ना कान पकडकर कहने लगती है मेन्शियां का - आपसे कहा था ना की , हमें रूबैन के ससुराल चलना है तो फिर आप क्यों सो रहीं है और जल्दी से तैयार होकर आ जाइये हम बाहर ही आपका इंतजार कर रहें है और सब इंतजाम हो गया है तो देर करने की जरूरत नहीं है और यह कहकर जाने लगती है तो मेन्शिया तनाव में आ जाती है और समझ नहीं पाती की , क्या करें ? आहन्ना तैयार होकर कमरे से बाहर निकल आती है और मेन्शियां को आवाज देने लगती है तो मेन्शियां वैसी ही बाहर निकलकर

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    चित्रांगना

    लगती है और मेन्शियां वैसी ही बाहर निकलकर आती है तो आहन्ना उन्हें देखकर नाराज होती हुयी कहने लगती है - हमने कहा ना वक्त नहीं हमारे पास तो आप देर क्यों करवा रही है मेन्शियां गर आपको नहीं चलना तो बता दीजिये लेकिन यूँ बूत बनी मत खडी रहियें और जल्दी से तैयार हो जाइये तो मेन्शियां बुझी आवाज में डरते - डरते कहने लगती है - वो , वो लोग रूबैन के ससुराल नहीं बल्कि आपके ससुराल गये है तो आहन्ना हैरत से दोहराती हुयी सवाल करती है - हमारे ससुराल .. भला हमारा कौनसा ससुराल कहाँ से आ गया ? तो मेन्शियां बताती है - वो लोग भारत गये है आपके ससुराल को देखने और यह जानने की , जो कुछ भी बताया गया है उनके बारे में वो सब सही और दुरूस्त है और जो कुछ भी उनके बारे में सुना है वो सब सही तो है ना और वो भी आप ही की तरह आपके बारे में जानते है या नहीं और यह सुनकर आहन्ना हारी हुयी सी बरामदें में रखें सौफें पर बैठ जाती है तो मेन्शिया पास बैठकर उनके घुटनों को पकडें हुए कहने लगती है - अभी आपने कहा था ना की , आप उन्हें देखना चाहती है उनसे मिलना चाहती है तो फिर हमें भारत चलना चाहिये तो आहन्ना कहने लगती है - अच्छी बात है हमारा ही दावं हम पर ही आजमाया जा रहा है तो मेन्शियां कहने लगती है - हमने कौनसा दावं खेला बल्कि आपने जो कहा हमने तो वही कहा है और आपको इनकार है उससे तो फिर कोई बात नहीं तो यह कहकर जाने लगती है तो आहन्ना कहने लगती है - हमने यह सबकुछ यह तस्दीक करने के लिये किया था की जो हमारा शक था वो सच था या नहीं और जहाँ तक वहाँ जाने का सवाल है तो वहाँ तो हम चलकर खुद से नहीं जाने वाले और वो लोग वहाँ गये है तो उससे भी कुछ नहीं होने वाला क्योंकि हम तो अपने इरादे पहले ही साफ कर चुके है की , हम वहाँ कभी भी नहीं जाने वाले और इस मेहनत का भी कोई मोल नहीं है क्योंकि उनकी शख्सियत में वो जलाल नहीं जो हमें उनके पास जाने के लिये मजबूर करें और हम पहले भी कह चुके है और अब भी कह रहें है की , हम उनसे मोहब्बत नहीं करते और ना ही कभी करेंगे .. लेकिन हम आपसे बहुत मोहब्बत करते है और हमेशा करते रहेंगे और