• bscpoetry 5w

    तलाश

    इस पुरानी भीड़ में आकर अच्छा सा लगता हैं
    इन पुराने आशिकों को देखकर अच्छा सा लगता हैं

    न जाने क्यूं लोग इन सब से डरते हैं
    हम इन के लिए हीं जीतें और मरते हैं

    इसे सैलाब कहों मगर यह नन्हीं सी दुनिया हैं
    जैसा भी दिखें तुम्हें यह एक बड़ा अनोखा सा ज़रिया हैं

    इसी भीड़ में मिला करते थे तुम इसी में आज खो गए
    तेरे मेरे हसीन पल इन जरियों इन रास्तों में क़ैद हो गए

    तू एक वज़ह देदे रुकने की मैं ता उम्र रुक जाऊं
    तेरी एक झलक मिलें मैं सारी उम्र वहीं ठेहर जाऊं

    हुआ कुछ भी न अब तो अपनी गली भी अनजान हो गई
    पहले पेहर निकलें थे तुझे ढूंढने अब रात हो गईं
    ©bscpoetry