• sanjeev_mrigtrishna 14w

    कुछ लोग कांटे बनकर रिश्तों में आ गए,
    यारों से हम थे भाई, चुभना सीखा गए।

    हैरत से देखता हूं,आज उनका आईना मैं,
    एहसानफरामोश हँसी क्यूं हमको भा गए,

    कुछ लोग कांटे बनकर रिश्तों में आ गए,
    यारों से हम थे भाई चुभना सीखा गए।

    लगकर गले मिले वो,अपने से लगते थे,
    रिश्तों की पीठ में बन खंजर समा गए।

    कुछ लोग कांटे बनकर रिश्तों में आ गए,
    यारों से हम थे भाई चुभना सीखा गए।

    कर लो यत्न भी कितना जुदा कर न पाओगे,
    मुँह छुपाते सब फ़िरोगें,जो हम अपनी पे आ गए।

    कुछ लोग कांटे बनकर रिश्तों में आ गए,
    यारों से हम थे भाई, चुभना सीखा गए।




    ©mrigtrishna