• anonymousmirza98 13w

    Coz...Death is compulsory

    डरता हुँ मौत से मगर मरना ज़रूरी है ।

    लरज़ता हुँ कफन से मगर पहन्ना ज़रूरी है ।

    हो जाता हुँ गमग़ीन जनाज़े को देख कर ।

    लेकिन मेरा जनाज़ा भी उठना ज़रूरी है ।

    होती बड़ी कपकपी कबरों को देख कर
    पर मुद्दतो इस कबर में रहना ज़रूरी है ।

    मौत के आगोश में जिस दिन हमे सोना होगा ।

    ना कोइ तकिया ना कोइ बिछोना होगा ।

    साथ होंगे हमारे अमाल और कब्रिस्‍तान का छोटा सा
    कोना होगा ।

    मत करना कभी गुरूर अपने आप पर
    ऐ इन्सान ।

    अल्लाह ने तेरे जैसे ना जाने कितने मिट्टी से बना कर ।

    मिट्टी में मिला दिए ।


    ©anonymousmirza98