• krishnatre 10w

    हम रूठे हैं खुद से तो मनाऐं कैसे,
    खुदा तेरी आयतें अब बनाऐं कैसे।

    शब में रहा चर्चा हमारे मशहूर होने का,
    इस चर्चे का राज अब सराहें कैसे।

    हम तो चोट खाए अपनी ही नज्मों से,
    उनके अल्फाजों के मरहम लगाऐं कैसे।

    आइने में ईंशा कितना बेजुबान निकला,
    उनकी झाईं को अपने शब्द सुनाऐं कैसे।

    समझे न शहरयार पानी हमारी आखों के,
    उन नासमझों को हम अश्क बताऐं कैसे।

    महरूम थे हम सच की इनायत से,
    रफीके-जिदंगी से रंजिश फरमाऐं कैसे।

    ©krishnatre