• asheenu 23w

    हिम्मत

    ये आंसु गवां है उन सारे पलो के जहाँ, इनहे बेवाजह बेहना पड़ा
    कभी तुम्हारे कंधे पर बह गए ...
    कभी अकेले में..
    कभी तुमने अंदेखा कर दिया ....
    कभी तुमने पूछा ही नी ...
    कभी बात करना जरुरी ना समझा ...
    कभी तुम्हें, 'जरूरी काम याद आ गया '...

    ना मेरे संदेश के जवाब दिया.. .
    ना कभी मेरे आंखों में देखा ...
    मैं रोज खुद से लड़ती रही...
    खुद को हौसला देती रही ...
    खुद को समझाती रही 'वो गलत नहीं है' ..
    खुद से ही बातें किया करती...

    एक जिंदगी थी बस ..
    उसी के भरोसे चलती रही ...
    ना किसी के साथ ..
    न उम्मीद
    बस इंतजार करती रही...
    उस पल का जब तुम फिर से आाके
    मुझे सिने से लगाके
    कहते 'में हमेश तुमहारे साथ हु'
    और आज भी इंतजार कर रही हुँ... .

    अब आदत सी हो गयी है ...
    रोती हु फिर भी
    सुकून है ...
    किसी के उम्मीद मे अपने आज को नहीं खो रही हुँ
    किसी कोने मे़ जाकर अपनी गल़तीयां गीन लिया करती हूँ...
    आज खुद को लोगो के बीच 'मुसकुराते' देख काफी साहस मिलता है ...
    थोड़ी बहुत हिम्मत हो गई है ...

    ....उम्मीद है एक दिन तुमहारा ज़िक्र मेरे चेहरे पे कोई शिकन नही लाऐगा ....
    और उस दिन से मैं खुद से प्यार करना सिख जाउंगी ...


    © asheenu