• kswapnil 25w

    समझना मुश्किल होगा, पहली पंक्ति में मैं मदद कर देता हूँ:

    जैसे नदियाँ पानी ले जाती हैं वैसे ही इन्द्रियाँ ले जाती हैं उस देवी की दिव्यता (आँखों से सुंदरता, कानों से मधुरता, नाक से सुगंध और त्वचा से कोमलता; चार नदियाँ)।
    दो आसमान होते हैं : एक दिन एक रात अतः हर वक़्त उनकी याद रहती है, दिन हो या रात।
    तीन ज़मीने एक दास्तान का मतलब है मस्तिष्क, हृदय और आत्मा तीनों उनके ही बारे में सोचते हैं, डूबे रहते हैं।
    उनकी तलाश में अगर रुक भी जाऊ तो जैसे आफताब(सूरज) हर रात डूबने के बाद भी अगले दिन फिर उगता है, वैसे ही रुकने के बाद मैं फिर ढूंढने लगता हूँ।

    (छठी पंक्ति : तीन अक्षरों का एक नाम यहाँ उस प्रेमिका का संकेत करता है)
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    चड्युतिकी

    चार नदियाँ, दो आसमान;
    तीन ज़मीनें, एक दास्तान;
    मन में लिए तेरा ख़्वाब,
    चला डूबने जैसे आफताब।

    चार पंक्तियाँ, दो शेर,
    तीन वादियाँ, एक पेड़,
    तुझे ढूंढता लगाने गले,
    मिल जा सांझ सूरज ढले।

    चार लम्हे दो पल,
    तीन घड़ियां एक वक्त,
    तू आई थी जैसे आयेगा कल,
    मैं भी जड़ हूँ, एक दरख्त।

    चार मौसम, दो कल,
    तीन तल हैं, एक धर,
    एक हृदय जिसमें चित्र तुम्हारा,
    दो साँसें जिनमें नाम तुम्हारा।

    चार फूलों की दो क्यारी,
    तीन महफ़िलों की एक प्यारी,
    सब सुंदरियों में तू न्यारी,
    मुझसे तेरी ये कैसी यारी।

    चार बोतलें और दो जाम,
    तीन अक्षरों का एक नाम,
    हर आशिक़ का यही काम,
    या जाम या नाम।

    चार धातु, दो तार,
    तीन मोती, एक हार,
    तुम दमकती हुई हीरे जैसी,
    मिली मुझे ईष्वर की माया जैसी।

    ©kswapnil