• niragjain 22w

    साथ

    सफर ही तो है बस
    और इससे ज़्यादा कोई दूसरा अर्थ नही मिला
    अभी तक तो यही समझ आयी है
    मुसाफिर ही हूँ ,घूमूंगा और भी कई जगह
    ढूंढूंगा कही कोई और भी अर्थ तो नही
    साथ मेरे मुझको ही चलना है
    एक दिन अपना साथ मिल जाएगा ऐसे ही

    ©niragjain