• urmit95 5w

    कैसी कश्मकश है ये,
    तूं छूटता भी नहीं;
    छूटना चाहता भी नहीं,
    दूर होकर भी इतने
    पास क्यूं है?
    दिल में इतना प्यार
    अाजभी क्यूं है?
    ये कैसा रिश्ता है;
    हम दोनों के दरमियाँ?
    बिखरकर भी फ़िर से,
    जुड़ जाता है!!

    - उर्मित शाह