• shayari_ki_dayari77 14w

    काश

    काश अगर वक्त पीछे लोटे तो, मैं भी तेरे साथ चलूं
    सोचा है मैने एसा कुछ, उन टूटे लम्हो को साथ तेरे जोडूं
     
    वो बूंदो मे भीगी तेरी पलको को, हाथों से अपने छुपा लूं
    वो तेरी हसीं पर बहल जाना मेरा, मैं फिर से उसी पहलू मे जी लूं
    वो मेरा तेरी तरफ देखते देखते, तुझमे ही खो जाना
    क्या मौजूद है वो समां अभी भी, मै जाकर उन्हे देखूं

    काश अगर वक्त पीछे लोटे तो, मैं भी तेरे साथ चलूं
    खो गया था जो तुझमे , मै खुद को तेरे पहलू मे ढूंढ लूं
    ©shayari_ki_dayari77