• nameisr 13w

    ग़ुरूर के हत्थे

    मेरी तरह कईं आशिक़ हैं तेरे हुस्न के
    आख़िर कबतक हम सबको लटकाओगी
    अग़र ऐसे ही तादाद बढ़ती रही मजनुओं की
    किसी दिन अपने ही ग़ुरूर के हत्थे चढ़ जाओगी

    © रवि