• feel_the_same 6w

    बेख़बर

    देखो, ये पँछीयाँ कैसे चहचहा रहीं हैं
    शायद तुम तक मेरी बातें पहुँचा रहीं हैं
    देखो, ये चाँद कितना उजला लग रहा है
    शायद तुम्हारी खूबसूरती से जला लग रहा है
    तेरे बिन सूखी सी हैं ये बारिशें
    तेरे बिन अधूरी हैं मेरी ख्वाहिशें
    सब को तो खबर है मेरे रहगुज़र
    बस तू ही रह गया बेख़बर

    इश्क़ इज़हार की मोहताज़ नहीं सनम
    मैंने तो तेरा चेहरा पढ़ा है
    मेरी आंखें जब भी हुईं हैं नम
    कसम से, मेरी अश्क़ का हर बूँद तेरी कमी में बहा है
    जुगनुओं से हो गयी हैं आज कल मेरी यारी
    तेरी तलब में ही कहीं खो गया हूँ,अब तुझमें ही बीतती हैं मेरी रातें सारी
    लकीरों का मिलना जरूरी नहीं
    इशारों से ही एक बार इज़हार कर दे
    मुकम्मल हो जाएगी फिर जाना जिंदगी हमारी

    देखो, ये हवाएँ कैसे महक रही हैं
    शायद, तेरी साँसों में से गुजरकर आयीं हैं
    देखो, ये फ़िज़ाएँ कितनी रंगीन हैं
    शायद तेरे सपनों में से होकर आयीं हैं
    मुझे तो तेरी आशिक़ी ने मारा है
    मैंने तो इक तुझी पे दिल हारा है
    सब को तो खबर है मेरे रहगुज़र
    बस तू ही रह गया बेखबर
    ©feel_the_same