• cb_m_a_r_t 6w

    । एक बात ।

    एक बात बनके अक्शर जमीं में उठती है,
    सुरु जैसी सिद्दत आखिर तक क्यूँ न टिकती है,
    मन बन जाये अलग होने का जिससे तो ,
    उसके अच्छे काम की भी अच्छाई कहाँ दिखती है।।

    C.BM
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