thesurajsingh

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  • thesurajsingh 1d

    अब तो मेरा बस एक ही मुकाम है
    अर्थी पर लेटे हैं सामने शमशान है

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    दो पाटों के बीच में वो आज कोई दरार सा लगता है
    वो पहले ऐसा नहीं था अब बड़ा बीमार सा लगता है

    यूं तो गैरजूं रहा ताउम्र वो और उसके परवरिश के लोग
    आज हाथ आया उसके कोई बड़ा व्यापार सा लगता है

    लूट खसोट बंदर बांट की आदत रही है सदा उसकी
    धर्म जाति देश समाज का वो अब ठीकदार सा लगता है

    वो चाहता है कि सब उसे ही पूजे सही कहें
    उसे अब मेरी कलम का दरकार सा लगता है

    उसने खरीद लिए है शहर के सारे निज़ाम
    उसे हर सच्चे इंसाफ से इंकार सा लगता है

    वो खुद को तो वेद कुरआन बाइबल सोरठा बताता है
    पर मुझे सूरज वो कोई अश्लील अख़बार सा लगता है

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    सच्चे को शैतान झूठे को आर्यावर्त का इमाम बना दिया
    वो इंसा के काबिल तक न था तुमने उसे भगवान बना दिया

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    टूटा वक़्त

    मेरे सीने की दीवार पर एक घड़ी टिकी है
    बहुत बड़ी नहीं मध्यम सी
    उसका एक किनारा टूट चुका है
    समय को बांधते बांधते वो थोड़ा अलसा गया है
    वाह रह रह के रुक जाता है
    एक धागे के बराबर वह हिलता रहता है
    उसके सुइए अब नुकीले नहीं है
    उनपर वक़्त की जंग लग चुकी है
    जो समय के आर पार देख सकती थी
    आज खुद उसके शीशे टूटे हैं
    पर वो टंगी हुई है अब भी
    पुराने यादों की तरह
    सब चाहते हैं कि उसे घर से बाहर कर दे
    समय थम जाए ये तो बड़ी दुविधा है
    पर मुझे यह घड़ी पसंद है
    मुझे सुकून है इस थमे हुए पल में
    अभी शून्य जैसी कोई बात नहीं है
    कालांतर में जब यह घड़ी चलती थी
    मैंने देखी है कई दुख दर्द
    झेलीं हैं तकलीफें कई
    आंगन का बंटना
    अपनों का बिछड़ना
    भूख गरीबी लाचारी कई चीजें
    देश समाज राजा रंक सबको देखा है मैंने
    मैं फिर से उन सब चीजों को नहीं महसूस करना चाहता
    मैं चाहता हूं ये पल यही ठहरा रहे
    समय यात्री की तरह किसी वार्म होल से लौट न आए
    मै चाहता तो समय में आगे भी का सकता हूं
    पर नहीं भविष्य न जाने क्या क्या छुपा रखा हो
    मुझे यकीन है उसने भी छुपा रखी होगी
    दुख दर्द त्रासदी
    मुझे यकीन है ऐसा इसलिए
    क्यूंकि मैंने घायल किए है अपने भूत को
    दिए हैं उसे कई जख्म
    जलाएं है जंगल सुखाई है नदिया
    काटे हैं पहाड़ खूब लड़े है खूब मरे है
    सत्ता संप्रभुता देश धर्म खूब किया है
    हमने खींची है एक दूसरे की टांग
    घोपी है खंजर अपनों के सीने में
    मुझे यकीन है भविष्य बुरा होगा
    नहीं बहुत बुरा होगा शायद नरक
    हां नरक, सुना है बुरा होता है
    सारे पापों की सजा मिलती है
    पर सवाल है सजा कौन देगा
    कौन है जिसने कोई पाप न किया
    कौन है जिसने किसी की हत्या नहीं की
    किसी का दिल नहीं दुखाया
    सारे हत्यारे है यहां
    मैं चाहता हूं ये घड़ी यहीं रुको रहे
    और रोक के रखे इस समयरूपी माया जाल को
    ताकि हम बेवकूफों को थोड़ा वक़्त मिले
    की वर्तमान सुधार सकें।

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    अंधेरों में रहने की आदत है अब उजालों से डर लगता है
    तेरी जुल्फों की छाव ही मुझ अंदलीब का घर लगता है

    © The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    बद्दुआ

    कुछ बातें अधूरी हो तो अच्छा
    तुम्हारी मंजूरी हो तो अच्छा

    बेवजह ही दिल कौन लगाए
    हां तुम्हें जरूरी हो तो अच्छा

    यूं तो सदियों सुनी है धड़कने तेरी
    अब तुमसे कुछ दूरी हो तो अच्छा

    कई सम्त में बिखड़ गया है ईमा मेरा
    अब कुछ बातें बुरी हो तो अच्छा

    तुमने लौटा दिए वो दोनो कंगन कुछ दिन रखकर
    तेरी कलाइयों में अब टूटी चूड़ी हो तो अच्छा

    मीर गालिब जॉन की माफिक खड़ी बोलू तो
    मुझे सूरज जबां के बाद कोई छुरी हो तो अच्छा

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    चांद आज सूरज से जरा नाराज़ मालूम पड़ता है
    शाम हो चुकी वो अब तलक वो बालकनी में अाई नहीं

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    इस महामारी में कुछ ऐसा फंस गया है अब इंसान
    जैसे गाल पे हो आंखो से बहते काजल के निशान

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    मैं सूरज तबाह हो जाता तो शायद अच्छा होता
    कुछ इस तरह वो महताब हमेशा सामने तो रहता

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 3d

    हम खुले आसमां में देख रहे थे
    तभी एक तारा टूटा
    उसने मन्नत मांगी
    मैंने पूछा- क्या मांगा?
    उसने कहा- कुछ नहीं।
    मैं मुस्कुरा दिया
    उसने भी मुस्कुरा दिया
    ये जानते हुए की वो झूठ बोल रही थी

    ©The Suraj Singh