100urav_indori

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  • 100urav_indori 2d

    @kshatrani_kalam happy birthday , god bless you ������

    @kshatrani_words एक इन्दोरी जब किसी व्यक्ति को बर्थडे विश करता है तो उसका कंटेंट कुछ यूँ होता है।

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    रसगुल्लों का सेवन करने वाली, भगवान के लिए निर्जला उपवास करने वाली, हमारी छोटकी की बड़ी बहन । मेरी आधी चॉकलेट पूरा खाने वाली, बुलेट की सवारी करने वाली । ऊर्जावान नेतृत्व की धनी मासूम बच्चों की शिक्षिका ।

    गौ माता की रक्षक तथा वृक्षों की संरक्षक।
    नाम के आगे क्षत्राणी का तमगा लगाने वाली ।
    गरीबों की मसीहा।ऊर्जावान महिला ।
    महांकाल बाबा की परम भक्त ।
    यारों की यार । दिल फेंक दिलदार ।
    युवा क्रांतिकारी । हरफन मौला ।
    हर परिस्थिति में दोस्तों का साथ देने वाली ।
    चाणक्य से भी तेज बुद्धि वाली ।
    पुरे भारत में जमशेदपुर का नाम रोशन करने वाली ।
    निडर समाज सेवी । सरल हृदय की स्वामिनी । याददाश की धनी। प्रखर वक्ता ।

    प्रधान मंत्री के साथ फोटो खिंचवाने वाली । मुख्यमंत्री को अपने कहने से चलने वाली , इत्तु सी चटनी में चार समोसे खाने वाली । पूर्व विधायक की भतीजी ।
    जमशेदपुर से रांची तक एक हाथ से गाडी चलाने वाली () । इस तरह के व्यक्तित्व की धनी है , हमारी अंजलि जी भगवान् भोलेनाथ उनके जन्मदिवस के शुभ अवसर पर उन्हें लंबा और महान जीवन प्रदान करे , यही प्रार्थना करते हैं।

    हमको party का इंतज़ार रहेगा।

  • 100urav_indori 4d

    #unknown ��
    smile please

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    आज सुबह बहुत देर से लोग आपस में गाली-गलौज कर रहे थे ,फिर मैंने वहां जा कर उन्हें समझाया ।

    तब जा कर कहीं मार कुटाई शुरू हुई ।

  • 100urav_indori 2w

    मैं एक ब्राह्मण परिवार से ही आता हूँ, बचपन से ही हमने धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ के हिस्सा लिया है। घर पर भी अम्मा सुबह-शाम की आरती करते तो उनके साथ घंटी बजाने और टूटे-फूटे शब्दों में आरती गुनगुनाने के लिए मैं भी खड़ा हो जाता था।

    उनकी पढ़ी हुई , दुर्गा चालीसा , शिव चालीस , हनुमान चालीसा, सुन-सुन कर ये सभी आज भी मुझे कंठस्थ है। लेकिन वो बचपन था जहाँ समझ का थोड़ा आभाव था हाँ किन्तु भक्ति बिल्कुल निस्वार्थ थी। खैर भक्ति तो आज भी निस्वार्थ ही है।

    जैसे-जैसे हम बड़े होते गए समझ का आभाव भी वैसे-वैसे कम होता गया। उस आभाव ने जब हमें कुछ समझने और सोचने की क्षमता प्रदान की तो समझ आया की अपने धर्म से सम्बंधित आज भी बहुत सी प्रथाएं और कुरीतियाँ जुडी हुई हैं और बदलते समय के साथ हमें धर्म से जुडी बहुत सी कुरीतियों को भी बदलने की या संसोधित करने की अति आवश्यकता होती है। कुरीतियाँ जैसे दीपावली में भीषण पटाखों का जलाया जाना हो या होली में बेशुमार पानी की बर्बादी का हो।

    वैसे तो हम कइयों कुरीतियों को देखते हैं लेकिन उनमें से एक को मैं उदाहरण के तौर पर बताता हूँ। घर में सभी तरह की आरतियों के साथ किसी भी तरह के पूजन में प्रथम वरीयता प्राप्त भगवान गणेश जी की आरती सुनना तथा उसे याद कर के मैं भी बचपन से ही उनकी आरती करते आ रहा हूँ।

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    Banjhan ko putra det?

    यह तब से था जब मैं उनकी आरती की यह पंक्ति "एक दन्त दया वंत, को "एक दन्त दया दन्त" गाया करता था और आस पास खड़े लोग मेरे मुह से यह सुन कर बहुत हँसते थे। पर मुझे नहीं पता था की उनके हँसने का अर्थ क्या है मैं तो अपनी भक्ति में पुनः विनिल हो जाया करता था। खैर वर्षों से गणपति जी की पूजा करते हुए, जब उनकी कथाकथित सबसे प्रचलित आरती "जय गणेश देवा" में मैं एक पंक्ति पढ़ता हूँ।

    (वह पंक्ति)

    "अंधन को आँख देत , कोढ़िन को काया।"
    " बांझन को पुत्र देत , निर्धन को माया। "

    मुझे लगता है इस पंक्ति का यह वाक्य "बांझन को 'पुत्र' देत" इसमें संसोधन करने की अब जरूरत है। क्योंकि यहाँ यह सवाल उठता है कि भगवान को प्रशन्न करने वाली उनकी आरती का यह वाक्य क्या पुरुष प्रधान समाज की सोच को इंगित करता है? यानि बांझन को पुत्र ही क्यों ? या फिर पुत्र की वरीयता प्रथम क्यों? हाँ यह हो सकता है की ये प्रार्थना कर्ता की एक अभिलाषा हो पर यह तो जरूरी नहीं है की यह हर एक प्रार्थना कर्ता की अभिलाषा हो।

    तो अगर आप सभी महानुभाव और सभी गुणी लोग मिल कर यहाँ इस शब्द को बदल कर और संसोधित कर इस पंक्ति का विकल्प खोजने में मेरी मदद करेंगे तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी। मैं यहाँ वो शब्द चाहता हूँ, जो (स्त्री और पुरुष या अन्य)किसी को भी उनकी को संतान रूप में प्रदान करने को इंगित करता हो तथा इन सबका एक समान महत्त्व या अर्थ देता हो। या फिर इस वाक्य के स्थान पर कोई और वाक्य का लगा होना या गाया जाना भी प्रभु भक्ति में कोई अंतर नहीं लाएगा। तो क्यों न हम इस दिशा में एक छोटा कार्य करें।


    ©100urav_indori

  • 100urav_indori 2w

    नैन मीचे, जो मैं देखूँ जग को,
    मन कहे हियाँ सब , बाग़ - बाग़।

    जो नेत्र खोल जग देखूँ , पल में,
    रह गया हियाँ सब, ख़ाक - ख़ाक।

    #100रब

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    .

  • 100urav_indori 4w



    कुछ लोगों को देख कर कभी-कभी सोचता हूँ के, एवेंजर

    एंड-गेम में ', थानोस' की विचारधारा बिल्कुल सही है।

    बस उन्हें हटा दो, मेरे लिए ये पृथ्वी फिर जन्नत बन जानी है।


    ©100रब

  • 100urav_indori 6w



    हाँ , तो अब बोलो भारत माता की जय।
    क्योंकि अब क्या 370 है, और क्या ही 35-A

    @100रब

  • 100urav_indori 6w

    @raaj_kalam_ka जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं बड़ी बहन ईश्वर आपको हमेशा खुश रखे। लोगों से घुलने मिलने का गुण हमनें यहाँ आपसे ही सीखा है। आपकी पोस्ट पढ़ने में मुझे कभी-कभी देरी हो जाती है, मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ। हाँ लेकिन ये नही होता की कोई भी रचना पढ़ना छूट जाये। वैसे भी आपकी पोस्ट पढ़ना किसी से छूट जाये ये हो नही सकता और ये आप होने भी नहीं देते ��, क्योंकि कभी छूट जाती है तो डाँट-डाँट पढ़वाते हैं। और सच में ये मुझे बहुत अच्छा लगता है, इससे अपनेपन का बोध होता है। दी बहुत सीखा है आपसे और बहुत सीखना बाकि है। ऐसे ही हमें प्रेरित करते रहें। जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें। ��������������������������������������❣️❣️❣️❣️❣️����������

    #osr
    #100rb
    #100urav_indori @kshatrani_kalam

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    एक राज़ की बात है।
    उसका राज है यहाँ ,ये
    उसके काज की बात है।


    एक साथ की बात है।
    सब प्यार करते उसे ,
    ये तो जज़्बात की बात है।


    एक साख की बात है।
    मैं कैसे मिल गया यहाँ,
    ये इत्तेफ़ाक की बात है।


    दिल के साफ़ की बात है।
    इंदौरी लिख रहा कलमा,
    ये एक मुराद की बात है।


    @100रब

  • 100urav_indori 7w

    अब-तक 5 जून ,10 जुलाई , 17 जुलाई , 21 जुलाई और मेरे जितने भी करीबी मित्रों का जन्मदिन आया हमनें उसमें फ़िज़ूल खर्च से बचते हुए, वृक्षारोपण का निर्णय लिया। यहाँ मैं आप सभी से हाथ जोड़ कर यह आग्रह करता हूँ। वृक्षों को काटने से रोकें और अगर कहीं उन्हें कटते देखें तो उसका विरोध करें।

    अख़बार दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार एक वृक्ष एक साल में लगभग 30 लाख रूपए की ऑक्सीजन प्रदान करता है और हम हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 15 करोड़ पेड़ काट दिया करते हैं। अखबार में आगे किसी स्विस अध्ययन का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए दुनिया भर में एक लाख करोड़ पेड़ लगाने की जरूरत है लेकिन इनके लगाये जाने का औसत 521 करोड़ है, यानि उसके एक तिहाई के बराबर।

    बात करते हैं उन कारणों की जो हमे दिखाई ही नहीं दे रहे हैं इन निम्नलिखित कारणों से वृक्ष दुनिया भर में सबसे ज्यादा काटे जा रहे हैं।

    1)-: जंगल की आग। (यह एक प्राकृतिक आपदा है।)
    2)-: लकड़ी से बनने वाले उत्पाद।
    3)-: निरंतर बढ़ता शहरी करण।
    4)-: स्थानांतरित कृषि।
    5)-: खनन।
    6)-: सड़क मार्ग बनने में।
    7)-: किसी ईमारत के बनने में।

    विडम्बना तो यह है कि हम सौ साल पुरानी ईमारत को संरक्षित रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और करते हैं। उसे विश्वधरोहर बनाते हैं, लेकिन जब बात वृक्षों पर आती है। हम यह सब भूल जाते हैं। जबकि जितना पुराना वृक्ष होता है वह उतनी ही ज्यादा ऑक्सीजन देता है।

    #100rb #100urav_indori ��☘️☘️☘️��☘️��☘️��☘️

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    क्यों सौ साल से अधिक उम्र वाले वृक्षों को भी हम विश्वधरोहर घोषित नहीं करते ? हम जानते है कि वो जीव हैं, उन्हें काटने पर दर्द होता है, तो क्यों हम उन्हें जीवंत व्यक्ति का दर्जा नहीं देते?

    वृक्षों के फायदे बताना तो मुझे लगता है यहाँ औपचारिक ही होगा। फिर भी कुछ बिंदुओं को आपसे साझा करना उचित समझता हूँ।

    ~ तापमान का नियंत्रित करने हेतु
    ~ वृक्ष एक साल में एक सौ किलो ऑक्सीजन देता है।
    ~ बारिश कराने में उत्तरदायी व् सहायक।
    ~ बाढ़ नियंत्रण में उपयोगी,जल को जमीन तक पहुचने का कार्य।
    ~ मृदा से जहरीले पदार्थ को सोखने का कार्य।
    ~ आस-पास की वायु को शुद्ध करने हेतु बहुत उपयोगी।
    ~ जड़ी-बूटी तथा औसाधिक गुण।

    शब्द सीमा के कारण मैं यहाँ ज्यादा न लिख सकने पर मजबूर हूँ। इनकी उपयोगिता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारे धार्मिक ग्रंथ इन्हें पूजने और इनसे सम्माननीय व्यवहार करने का उल्लेख करते हैं। "भुर्जज्ञ उत्तान पदो" ऋग्वेद में उल्लेखित यह वाक्य कहता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति ही वृक्षों से हुई है।

    दोस्तों मैं कइयों बार अपने आलेखों में इसका ज़िक्र कर चुका हूँ, और जब-तक सांस है मैं यह करता रहूँगा। लेकिन अब मैं अपनी इस ज़िद में अपने सभी आदरणीय मित्रों का और इस वसुधैव कुटुंब का साथ चाहता हूँ।

    आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के मौके पर मैं आपसे आपकी संवेदना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप उत्तरदायी बने अपने सामने हो रहे अन्याय के प्रति। हाँ हमें फर्क पड़ना चाहिए बढ़ते अत्याचार से, हमें फर्क पड़ना चाहिए लिंचिंग की तकरार से, हमें फर्क पड़ना चाहिए हर एक बलात्कार से, "हमें फर्क पड़ना चाहिए दोस्तों , हमें फर्क पड़ना चाहिए"।

    अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगा, जल को व्यर्थ न करें उसे व्यर्थ बहनें से रोकें। हर सांस्कृतिक समारोह में वृक्षारोपण करें। फ़िज़ूल खर्च या दिखावे की जगह अपने जीवन में सार्थकता लाने की कोशिश करें। एक ही बार उपयोग में लाया जाने वाला प्लास्टिक को न लेना यह बहुत ही अच्छा होगा।

    ©100रब

  • 100urav_indori 7w

    वैसे तो उसके प्रेम को शब्दों में उतारने के काबिल नहीं हूँ मैं, यह बस
    उसके सम्मान में और वात्सल्य प्रेम का चित्रण करते हुए लिखने की कोशिश की है।


    अर्थात खाना परोसते समय हमारी माँ न चाहते हुए भी अधिक भोजन दे देती है। यानि 2 रोटी को एक ही गिनती है, जाने उस समय उसकी गिनती को क्या हो जाता है।

    हाँ तो दो रोटी को एक गिनने वाली वो अनपढ़ महतारी से ज्यादा प्रेम पा सकना शायद संभव नहीं है।


    #100rb
    #100urav_indori
    जुंड़ी -: अनाज,
    यहाँ रोटी के लिए प्रयोग किया गया।
    महतारी - माँ , अम्मा

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    दुई जुंड़ी को एकही गिने वो,

    कैसी अनपढ़ "महतारी"।

    ©100रब

  • 100urav_indori 7w

    फर्ज हो, तुझे देखने का एक अर्ज हो।
    मर्ज हो, तुझे चाहने का मुझे मर्ज हो।

    ©100रब