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  • __radz 1w

    घर

    कई सादिया बीती इन आंखों को घर देखे
    दीवारें मिली हर जगह
    आसरा ना मिला
    ऐ नादान दिल - ए- आरज़ू तुझ सा
    रूठा मिला बेचारा ना मिला

    हर दस्तक में सुनाई देती है
    घर की चौखट पर तुलसी की कलम
    हर मुस्तफे संग रंगो में रंग जाए
    ऐ मुसाफिर तुझसा बंजारा ना मिला



    Radz।
    ©__radz

  • __radz 6w

    बंद

    बशर्ते इल्म है तेरी मोहब्बत का
    दिलसे रूठी हुई बिखरी इबादत का
    हम तकाजा भी नहीं देते इतनी सिसक है उनकी आह में
    वो बंद रखे शीशे सी चाह को अपनी निगाह में
    हम भी पत्थर से दिल को थपकियों में बांध दिए
    उनकी रियायत को हम अनदेखे ही जान दिए।
    ©__radz

  • __radz 9w

    बुद्धू ❤️

    एक प्यारे नगमे से गुनगुनाते हो
    तुम सावन की तरह आते हो

    कानो में सरगम लिए कभी लोरी बन जाते हो
    कभी किवाड़ पे लगी झूमर की तरह खिलखिलाते हो

    एक साया हो कभी अजनबी जैसा
    फिर भी क्यों अपने से नजर आते हो

    बारिश की पहली ओंस के शिकवे
    तुम दवबिंदू,आंगन में सज जाते हो

    आंखों में ज़िन्दगी भर का जो गम नजर आता है
    जाने कैसे इतनी बेखौफ बेईमानी से मुस्कुराते हो

    तुम्हे गुजर जाना है युही या ठहरोगे घर समझकर
    एक मुसाफिर हो या हमराही, उफ़ कुछ ना समझ आते हो!
    ©__radz

  • __radz 9w

    Lockdown

    Post lockdown, let's be more kind and open minded towards society. Sometimes we let people be. Sometimes we ask if they need help. Sometimes we adress the city as our family and thus, keep our home and environment clean!

    Let's get carried away with the thoughts of how beautiful the present is and Let the little joys decide the fortune of our livelihood.
    Let's seek success for the amount of passion and happiness it may bring us.
    Let's do one thing that we love every single day and be more grateful about the things we have rather than thinking about the things we've lost.
    Let's be more human. ❤️ Post lockdown,
    Let's live with truest sense of liberty.

    ©__radz

  • __radz 13w

    कांधे पे सर

    सब कुछ खो दिया तुझे पाने के लिए...
    आज तू ही नहीं... ये हसीं मंजर सजाने के लिए!

    ...काश ऐसा कोई मंजर होता
    मेरे कांधे पे तेरा सर होता।
    ©__radz

  • __radz 14w

    Sunshine

    I wanted you to be like rain
    Which leaves ecstacy behind...
    Its odour is reluctant
    Its presence predefined.

    Instead you chose to be a dew drop
    Faded away in the darkness.
    And left me with sunshines. ✨
    ©__radz

  • __radz 14w

    Word Prompt:

    Write a 8 word micro-tale on Laughter

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    उनकी मुस्कुराहटों से सुबह सजती है मैखाने की तरह!

  • __radz 14w

    गुफ्तगू

    इंतज़ार होता है जब वो उलझते है महकते शब्दों से ,
    किताब के भीतर रखे पन्नो में सिमटे गुलाब की तरह,
    पर याद आते है वो पहली मोहब्बत की तरह!
    ©__radz

  • __radz 15w

    उलझन

    खुद में ही उलझा रहा मैं
    खुद को ही सुलझा रहा हूं !
    ©__radz

  • __radz 15w

    भीतर

    आज बात हुई कुछ खुद से
    और पता ही नहीं चला कि कब इतनी बड़ी हो गई!
    इन सालों में कभी समझ ही नहीं पाई
    के हर दुख में हर सुख में हर आहट में
    एक दोस्त हमेशा थामे हुए थी मेरा हाथ
    एक दोस्त जो हमेशा थी मेरे साथ

    तो क्या हुआ अगर दुनिया अनजान है
    वो सब जानती है
    मुझे अपने मंजर का मसीहा मानती है
    कभी देख ही नहीं पाई
    प्यार जो ढूंढा
    हर नुक्कड़ पे
    वो भीतर था!
    आज मिली मैं उससे
    और पता ही नहीं चला कि कब इतनी बड़ी हो गई!
    ©__radz