_mann_j

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24 | Leo | 11 Nov Engineer...����

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Reposts
  • _mann_j 19h

    Kch smjh hi nhi ata kya likhe....��

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    साथ निभाना है मेरा तो कुछ ऐसा निभा,
    ज़माना छूट जाएं हमारी कहानियों के लिएं!

    - मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 2d

    टूट है...!��

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    ,

  • _mann_j 2d

    Aage likhna tha bt kch aya hi nhi....����
    Koi nhi chai pio aur khush rho...����

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    करके बेहाल हमें वो फिर रोने आया,
    एक चहरा मेरी रूह को रुलाने आया!

    है कुछ आँसू छुपाने और दिखाने को,
    हर एक शक्श ऐसे बहाने लेके आया!
    - मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 3d

    BG google....��
    Ek terfa mohabbat ki baat hai....��

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    दर्द ना सहपाओ तो एक ये काम कर दो,
    बिन-बताएं उसे सारी किताबे बंध कर दो!
    ©_mann_j | मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 1w

    Freb ishq walo se to khud durr hi rkhe...��

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    मोहब्बतों को अब पैसो में देखने लगी,
    मक्कार मग़र इश्क़ सच्चा देखने लगी!

    है करम मालिक का हम पर कुछ ऐसा,
    ज़िन्दगी इन हमबग से दूरी देखने लगी!
    ©_mann_j | मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 1w

    तुझसा ना कोई हसीन है और ना होगा,
    तुझे हर कोई अपने बाग़ में चाहता होगा!
    ©_mann_j | मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 1w

    Morning ppl....������
    BG google img...!

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    लौटकर वो हमसें फिर हमारा हाल पुछेंगे,
    मगर इसबार बताने उन्हें हम नही मिलेंगे!
    ©_mann_j | मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 1w

    Collab kro collab...��

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    बे-अदब भी अदब से पेश आए,
    उस दिन घर को सब रोने आए!
    ©_mann_j

  • _mann_j 2w

    ख़बर लग जाती है हमें भी तुम्हारी,
    तुम जरा देर कर देती हो बताने में तुम्हारी!

    ये तो नेमत है रब की हमारे ऊपर,
    यार तुम जरा खैर करो हालात पर हमारी!

    बताएँगे तुम्हें इश्क़ का हर पहलू,
    जरा मौजूदगी दिखाया करो छतपर तुम्हारी!

    एक सुकून की शाम ऐसी भी चाहिए,
    जरा हाथों में हाथ और साथ चाय तुम्हारी!
    ©_mann_j | मनोजसिंह परमार

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    शाम और चाय...!☕

  • _mann_j 2w

    Kaisa chal rha h quarantine...? ������
    Mere to bht bure halat h...��

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    झुकाकर नज़रे फिर तुमनें यूँ हालात कर दिएं,
    बैठें थे अकेले फिर तुमनें यूँ मग़रूर कर दिया!
    - मनोजसिंह परमार