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  • _raj_kr_ 16w

    उम्मीदों के अफ़ीम

    NCB ने अपनी वार्षिक Report में बताया है
    कि भारत के 150 करोड़ लोग नशा करते हैं
    'उम्मीदों के अफ़ीम का नशा' इसे सांसद में तैयार
    करके लाल किले से क्रमबद्ध तरीके से बांटा जाता है।
    इस वर्ष Covid 19 के कारण विदेशी सहायता लेनी पड़ी
    French Rafale jet से पूरे देश में वितरण हुआ
    हर कोई इसका सेवन करता है इसके प्रभाव में आने से
    उच्च श्रेणी के लोग ख़ुश रहते है,
    मध्यम वर्गीय ख़ामोश हो जाता है
    और निम्न श्रेणी के बारे में आप जान कर ही क्या कीजिएगा।
    इसका कम मात्रा में सेवन करने से लोग प्रेमी
    और अधिक सेवन करने के व्यक्ति कवि बन जाता है।
    उम्मीदों के अफ़ीम का नशा।
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 26w

    तेरी एक झलक भी ना पा सकूँ,मुझे ऐसी ही क्यों सजा मिली
    तेरे होठों को जब छुआ गया,उसी पल में दिल को दवा मिली
    वो जो क़ाफ़िला था बहारों का,तेरे घर पे आके है रूक गया
    तेरी हाथों में मेहंदी जो थी,वही खुशबू जा-ब-जा(everywhere) मिली
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 38w

    एक बांस पे लटका बैग
    उसको धर कांधे पे चलता
    एक पथिक से पूछा किसी ने
    Lockdown में भी निकले हो
    कुछ तो बात रही होगी
    यूँ ठहर गयी दो बोझिल आँखे
    मंथन कर फिर कहा पथिक ने
    यह बैग नही, शव लोकतंत्र का
    एक बांस कि अर्थी है ये
    गली गली हर ग्राम शहर में
    ढूंढ रहा था परिचित इसका
    कोई नहीं जब आगे आया
    तब जाकर में चला अकेला
    एक बांस कि अर्थी लेकर
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 46w

    सब धोखा है

    सब धोखा है सब धोखा है
    पांव में कंकड़,चांद पर पत्थर
    बर्फ़ का गोला,आग की लपटे
    दिन का शोर,रात खमोशी
    जिस्म सफ़ेदी,मन का चोर
    शून्य की सेना,शून्य विजय है
    सब धोखा है,सब धोखा है
    मीठे काजू, सूखी रोटी
    सेठ का बंगला, झोपड़ पट्टी
    नंगी सड़के,कोमल शय्या
    खोटा सिक्का,नोट हज़ारी
    सब धोखा है सब धोखा है
    अस्थि का मटका, गंगा पानी
    दिल कि धड़कन, शव की सांसे
    मय में लिप्त, गीता का सार
    पुस्तक मोटी झूठा ज्ञान
    जीवन गाड़ी,मौत की पटरी
    सब धोखा है, सब धोखा है
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 48w

    माँ के हाथ की

    *माँ के हाथ की रोटी ला दो*
    घर आंगन से दूर रहे जो
    हालत से मजबूर रहे जो
    ऑफिस कॉलेज से जो थक के आए
    सिर्फ इतना ही वो बस चाहे
    माँ के हाथ की रोटी ला दो
    छोटे छोटे कमरों में रहना
    दिल में जो भी कुछ ना कहना
    कभी कभी कोई शहर में आए
    दूर गांव कि खुशबू लाए
    उनको ही सब दर्द सुनाए
    माँ के हाथ की रोटी ला दो
    एक हाथ से आटा गूंथे
    एक हाथ से आसूं पोछे
    मुंह में कोई स्वाद ना आए
    दाल का छोंका भी जल जाए
    हम लड़के बस इतना चाहें
    माँ के हाथ की रोटी ला दो
    किसी रोज़ को शाम ढले जब
    बिछड़े सारे यार मिले जब
    बहुत देर मंथन करने पर
    सबके मन में प्रश्न ये आए
    restaurant से क्या क्या मंगवाएं
    माँ के हाथ की रोटी ला दो...
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 67w

    मिल जाएगा

    मन व्याकुल है, मौन हृदय है,उसका हल मिल जाएगा
    नयन सदा ही जिसको खोजे आज या कल मिल जाएगा
    जिस मंदिर में,मैं जाता हूँ, वो भी एक दिन आ जाए
    पुण्य किया जो अबतक मैने उसका फल मिल जाएगा
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 70w

    Amature thougths/ bs yun hi

    Jis bhi hasina se ki hai mohabbat wo toh humse khafa hi nhi hai,
    Agar aisa hi chalta rha doston, lagega ki kuch bhi hua hi nhi hai,
    Mujhe sahayri ka tajurba hai bs inta
    Lab tak hi rahe wo, kalam ko toh usne chua hi nhi hai.

    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 75w

    लगता क्या है?

    अंधेरे कमरे के बाहर रोशनी होगी, लगता तो है
    उसके जाने के बाद खलबली होगी, लगता तो है

    एक उम्र के बाद नही आता है मिलने कोई
    घर उसके,हर एक दीवार बोलती होगी,लगता तो है

    देखा मयख़ाने में और हाल पूछे बिना चली गई
    वो ना,ज़रूर एक अजनबी होगी, लगता तो है

    एक उम्मीद का दरिया था सब प्यास बुझा आए
    उसी दरिया में अब खुदकुशी होगी,लगता तो है

    कमज़र्फों को भी जाना है जन्नत मौत के बाद
    शायद वहीं कोई गड़बड़ी होगी, लगता तो है
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 75w

    तुकबंदी

    हो गई है मोहब्बत उनसे,क्या इतने बुरे है वो
    करूँ उनकी ही शिक़ायत उनसे,क्या इतने बुरे है वो

    सबको गले लगाते हैं, हाथ मिला लूं क्या ?
    मैं भी करूँ अदावत उनसे,क्या इतने बुरे है वो

    ख़्वाब आ जाते है नींद भी लेकिन आना चाहे
    मांगें मगर इजाज़त उनसे,क्या इतने बुरे है वो

    मौत को एक दिन आना होगा, मालूम है
    जाँ की करूँ हिफ़ाज़त उनसे,क्या इतने बुरे है वो

    बातें सारी हो जाती है नज़रें नही मिलाते हो
    कैसी है ये ग़ैरत उनसे,क्या इतने बुरे है वो
    ©_raj_kr_

  • _raj_kr_ 83w

    आस है सबसे

    नदी तालाब सूखें हैं,ये कैसी गर्मी है सोचो
    सब ख़ामोश बैठे है बहुत बेशर्मी है, सोचो

    डायनासोरों के जैसे रहे नदियाँ किताबों में
    क्या हो महबूब के बदले रहे पानी जो ख़्वाबों में

    पैसों से मिलेगी बूंदे तो कितना कमाओगे
    बुज़ुर्गो को या खुद को या कि बच्चों को पिलाओगे

    रंग बदलेगा गिरगिट का वही आघात फिर होगा
    कयामत भूल जाएंगे कि जब बरसात फिर होगा

    ये मंज़र दूर लगता हो मगर ये पास है सबसे
    जाहिल लोग बदलेंगे यही तो आस है सबसे
    ©_raj_kr_