_yashika_bhardwaj_

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efficient in expressing my thoughts age - 20

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  • _yashika_bhardwaj_ 4w

    मैंने ढूँढा सुकून हर तरफ़
    कही मिल न पाया
    फिर जाके अपनी छत पर बैठ गया, जहाँ से तेरा घर दिखता है।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 7w

    Every rain comes with your essence
    For you have given me thousand moments to remember.

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 13w

    Nothing

    Hearing knocking at the door
    I came running, but I saw nothing
    With every ounce of matter I held, I dragged myself towards it and saw Nothing!
    Your voice echoed in my head
    Relentlessly putting my reality on hold,
    Outside the window I saw you smile, I leaned forward to catch, I found Nothing!
    I sensed you smiling, running and calling my name,
    When I searched for you, I found Nothing!
    I saw the candle flicker, I thought you blew it
    When I searched for your breathes, I found Nothing!
    I have been running, felling and then standing up,
    Dodging every possible thought of you,
    Like a lunatic I came looking to the grave,
    But.. I found Nothing!

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 20w

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    कड़वा हूँ मैं बहुत लोगों के लिए
    तुम ख़ैर मनाओ, मोहब्बत है तुमसे।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 20w

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    हाँ ठीक है हिसाब किताब और दुनियादारी
    महसूस करने के लिए शायरी ज़रूरी है।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 29w

    मुझे कुछ वक़्त पीछे भेज दो,
    की मेरे जैसे लोग नहीं है यहाँ,
    मेरी ज़िन्दगी में कुछ किस्से बनते है
    उनकी किस्सों में ज़िन्दगी है ।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 29w

    क्या बताया मैंने तुम्हें ?
    कितना अधूरा हूँ मैं ?
    जैसे सावन बिना बरसात के, बिल्कुल वैसा हूँ मैं
    हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ लोगों के बीच,
    अकेले में, जैसे एक बन्द कमरा होता है, बिल्कुल वैसा हूँ मैं।
    न शोर से ताल्लुख़ बचा न ख़ामोशी से मतलब है,
    जैसे मेले में खोया बच्चा, बिल्कुल वैसा हूँ मैं।
    क्या वक़्त बचा है सोने और जागने का,
    जैसे कोई बेघर, ठंडी रात में , बिल्कुल वैसा हूँ मैं।
    क्या करूँ अब मिलकर लोगों से ,
    जैसे बहरा शोर में, बिल्कुल वैसा हूँ मैं।
    क्या करूँ कुछ बताकर किसी को ?
    जैसे पतझड़ की एक बेजान पत्ती, बिल्कुल वैसा हूँ मैं।
    क्या बताया मैंने तुम्हे?
    कितना अधूरा हूँ मैं ?
    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 31w

    न जाने किस का क़र्ज़ उतार रहा हूँ मैं
    ज़िन्दगी रोज़ खुशियों का हिसाब मांग लेती है ।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 80w

    दूर थी तुम पहले , अब भी उतनी ही हो
    पहले रास्ता दीखता था अब फ़ासला दीखता है ।

    ©_yashika_bhardwaj_

  • _yashika_bhardwaj_ 80w

    ख़त..

    आज कुछ अहसास हुआ,
    थोड़ा मतलबी होने का ।

    नन्हे हाथो में कलम पकड़ा कर , ऊँचे सपने जिन्होंने दिखाए, हम उन्हें ही तनहा कर आये
    बात बात पर रोते हुए जाना , एक पुचकार से सब भूल जाना ,
    वो सर्दी में मेरे कानो को हाथो से ढकना ,
    मेरे सोते हुए , गालो पर चूमना
    मेरे बनाई सभी चीज़ों को , खूब संभाल कर रखना
    हर छोटी ज़िद पूरी करने का वादा ,
    ना पढ़ने पर , रोज़ का ताना ,
    मेरे बीमार होने पर , मैं बीमार हो जाती मेरी माँ का ये कह जाना ,
    बच्चों के शौक ज़्यादा ज़रूरी है , पापा का ये जता जाना ,
    मेरी स्कूल की बातें सुनकर खूब खिलखिलाना ,
    वही मैं रोऊँ जब , मेरा सर सहलाना ,
    किसी भी चीज़ की चाहत पर , अपने शौक अलग हटाना
    खुद टूटे चश्मे के साथ, हमे रंगीन दुनिया दिखाना
    स्कूल की रोक टोक से लेकर , पूरी स्वरंत्रता दे जाना ,
    गिरे तो कभी खुद पकड़ना कभी खुद उठने देना ,
    बच्चों के लिए , सारी दुनिया से लड़ जाना ,
    मुझे सब याद है ।

    वो पढ़ाई की ओर लावरवाहि करने का , मम्मी पापा को छोटी छोटी बातों पर परेशान करने का ,
    वो घर छोड़ते हुए , पापा की आस का
    गले मिलकर पापा के प्यार का , उनके आसुंओं के ठहराव का ,
    मम्मी की चुप्पी , उसमे छुपी फ़िक्र का ,
    दोनों के अकेले रहने के अहसास का , वो ट्रेन के इंतज़ार का , आँखों में जाने के अफ़सोस का ,
    वो आख़री सवाल का , यही रुक जा ।
    वो सभी गलतियों का , मुझे अहसास है ।

    माँ बाप की बीतती उम्र का , अपने अभी किसी काबिल ना होंने का मुझे अहसास है ।
    इतना सब करने के बाद , उनको अकेला छोड़
    सपनो के पीछे भागने का , मुझे अहसास है ।
    ©_yashika_bhardwaj_