a_heavenly_medicine

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at :- sawaligov@gmail.com I'm smiling , but this medicine too is unable to heal my soul...

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  • a_heavenly_medicine 2d

    .

  • a_heavenly_medicine 1w

    आने वाले लम्हों को हम बुनते रह जाते हैं,
    कहीं न कहीं यह सोचना ही भूल जाते हैैं,
    कि यह ताउम्र महज एक ख्वाब बनकर भी हमारे साथ दफ़न हो सकते हैं ।

    कल हसीन हो इसकी आरज़ू में हम आज को कभी जी ही नहीं पाते हैं।
    चाहे सुन- समझ ले इंसान कितना ही,
    तक़दीर के ख्यालों में उलझकर मायूसी से हम बिखर ही जाते हैं।

    उन चंद पलों की खुशी के लिए ,
    हम पूरी शिद्दत से मुकम्मल बनने की कोशशों में ही दिन गुजारते हैं।
    माना यह जाहां भी तन की प्यास में यह सोचना ही भूल जाता है,
    फिजा यह सिर्फ चार दिनों की जवानी है,
    खत्म इस फितूर को तो आज न कल होना ही हैं।

    मानने को शायद ही कोई तयार है,
    रिश्तें तो जिंदगी भर सिर्फ कुछ ही रह पाते हैं,
    क्योंकि दिल को सिर्फ दिल ही रूझा सकते हैं।

    मानते हैं हम वो रातें जरूरत ना हो मगर तलब मजबूरी बन चुकी हैं।
    लेकिन दस्तूर मोहब्बत का सिर्फ खूबसूरती से ही जुड़ा है,
    कसूर ना जाने किसका कि ,
    यह गलतफहमी ही बनकर रह गया है,

    नूर इश्क़ का अब बस बदनों में कैद सा रह गया है ।

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    ,

  • a_heavenly_medicine 3w

    वो सोचते हैं कि नफरत है हमें किसिके करीब आने से ,
    लेकिन ख्यालों से उनके वाकिफ होते हुए भी बेखयाली से बन गए ।
    असल में राज़ तो यह था कि हम कभी खुद के ही ना बन पाए ।
    कैसे ख्याल करे अपनों का भी,
    हबीब हम अपने ही ना बन पाए।
    बेवफ़ाई की दुनिया में जीते जीते ,
    हम अपने ही जाहां में काफ़िर बन गए।
    दिन गुज़रे , बींती राते ,
    नजाने क्यों खुदसे ही खफा रहते हैं बिना वज़ह के।
    कैसे ना रोके खुद को परवाह करने से ,
    डर को लगता है किसीको
    तलब बनाने से।
    चाहे हम बुरे क्यों न हो हर किसी की नज़र में ,
    समझ ले अगर कोई हमें ,
    तो कभी ना ढूंढ पाएगा खोट हमारे जमीर में ।

  • a_heavenly_medicine 3w

    ॥ दफ़न हैं कहीं ... ॥

    कतार- ए- जिंदगी को तलाशें नज़्में मेरी ,
    कुछ कोरे कागजों पर निशान छोडती ,
    तो कुछ मेरे सीने में ही दफन है कहीं ।
    कुछ दिलनवाजी में मैंने लिखी ,
    पर कुछ रह गई अनकही ।
    नहीं जानते क्यों वो रूहानी बातें खों सी गई ।
    शायद नाकाबिल मेरे लब नहीं ,
    यह वक़्त ही लाज़मी नहीं ।
    ऐतबार कर पाए कल्ब पर , इसी की राह में रूह थमी सी है मेरी।
    शायद इसलिए दस्तक ना आ पाई उन नज्मों की कलम पर मेरी ।
    शायद उन अल्फाजों पर भी
    फितूर मेरे अश्कों का है जिनका कोई इल्म ही नहीं ।

    ऐसा ना हो , ताल्लुख उनके गुमनाम रहे हममें ही कहीं ,
    और ताउम्र हम जहान को कोसे कैफियत के लिए हमारी ।
    ऐसा ना हो, मुसाफिर बनने आए इस सफर के,
    काफ़िर बनके रह जाए खुद में ही ।
    सीख तो ले हम जीने के दस्तूर कई ,
    लेकिन ऐसा ना हो, उन नज्मों के आशियाने में बसी
    बेबस रूहानियत दफ़न ही रह जाए कहीं।

    - SAWALI GOVINDWAR

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    ॥ दफ़न हैं कहीं ... ॥

    कतार- ए- जिंदगी को तलाशें नज़्में मेरी ,
    कुछ कोरे कागजों पर निशान छोडती ,
    तो कुछ मेरे सीने में ही दफन है कहीं ।
    कुछ दिलनवाजी में मैंने लिखी ,
    पर कुछ रह गई अनकही ।
    नहीं जानते क्यों वो रूहानी बातें खों सी गई ।
    शायद नाकाबिल मेरे लब नहीं ,
    यह वक़्त ही लाज़मी नहीं ।
    ऐतबार कर पाए कल्ब पर , इसी की राह में रूह थमी सी है मेरी।
    शायद इसलिए दस्तक ना आ पाई उन नज्मों की कलम पर मेरी ।
    शायद उन अल्फाजों पर भी
    फितूर मेरे अश्कों का है जिनका कोई इल्म ही नहीं ।

    ऐसा ना हो , ताल्लुख उनके गुमनाम रहे हममें ही कहीं ,
    और ताउम्र हम जहान को कोसे कैफियत के लिए हमारी ।

  • a_heavenly_medicine 17w

    Time was running out and with that her hopes too must be recieving extinction.
    This was what I interfered through noisy respirations and dark Halloween shadows beside the roadside .
    " No , please leave me ....
    Let me go home , I am sorry...
    Please let me go home, please I beg you ...I beg you...let me......"
    AND A LOUD CRY.................!
    THE yelling ended as I walked speedily ahead to reach familiar narrow streets which too now seemed too broad for me to cross .
    I reached my dorm and shut the door , I used to believe myself but now kept checking the door lock several times .
    I was gulping down the fear every passing moment which eventually killed my hunger and calmness.
    I laid down on the couch with the headphones to sooth my trembles and to forget the question , WHAT WOULD HAPPEN TO THAT GIRL ?....
    Breathing deeper and deeper I felt into sweet dreams again ....
    I went to the world where I could say proudly,
    Ooh I belong to place where girls roam safely with their brothers ahead of them ...
    I belong to where forests beside highways don't receive dead naked girls anymore .
    I belong to the world ,
    Where Goddess are not only seen in temple but within the insight of every wandering girl...
    I belong to the home where my brother is also warned to get in before 8:00 pm
    If he's no work outside the house so that my other sisters who have to walk on streets due to their duties should feel safe ...

    TING TING.... Alarm rang and I saw myself in mirror as everyday, again to put some courage to step out .
    Dressing myself again I hoped that it won't be my turn to be undressed by anyone else this night too .
    I finally stepped out wishing that I will be able to step in again .


    #belong #respectwomen


    #justiceformanishavalmiki @odysseus @writersnetwork @tuhina_sharma @jiya_khan @12_nasamajh_18
    #time #writingcontest

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    .

  • a_heavenly_medicine 17w

    कितने अच्छे थे न वो नादानी वाले दिन ❤️;

    जब हम बेफिक्री से घूमते थे ,
    अब तो हम इत्मीनान से चला भी नहीं करते है।

    जब हम चोट लगने पर सबको दिखाए फिरते थे ,
    अब तो टूट जाने पर भी हम दर्द छिपाया करते है ।

    जब हम गलती करने पर डर जाते थे ,
    अब तो हम गलत काम को भी आराम से कर लेते हैं।

    जब हम किसिके प्यार से सहलाने पर मुस्कुराया करते थे ,
    अब तो प्यार करने वाले भी चुनिंदा लोगों को ही मिलते हैं ।

    जब हम किसी की सूरत या कपड़ों की वजह से उनके साथ नहीं खेलते थे ,
    अब तो लोग किसी का दिल ही नहीं देखते हैं ।

    जब हम अपनी ही शरारत पर दांट खाने से रूठ जाते थे ,
    अब तो औरो की गलतियों पे भी हम खुद को तकलीफ देते है ।

    काश वो दिन फिर लौट पाते ,
    काश हम फिर्से वो नादानपरिंदे बन पाते ।

    - Sawali Govindwar


    #fridayfun #lost #missingit @odysseus @tomorrow_is_amazing @12_nasamajh_18 @jiya_khan @daffodilpearlzz

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    .

  • a_heavenly_medicine 17w

    SOMETIMES.

    SOMETIMES I FELT LIKE BEING MYSELF WILL LEAVE OTHERS
    UNAFFECTED,

    BUT I ALWAYS HAD A FEAR OF BEING UNACCEPTED.


    SOMETIMES I FELT LIKE TO END THIS LIFE SO SENSELESS,

    BUT I ALWAYS HAD A FEAR OF STRANDING PEOPLE WHO LOVE ME BEING SELFLESS.


    SOMETIMES I FELT LIKE IT WAS GOOD TO BE UNBORN,

    BUT I ALWAYS HAD A FEAR THAT SOMEONE WOULD HAVE SMILED LESS IF I HADN'T BORN


    I ALWAYS DO FEEL THAT I CAN DO SOMETHING FOR THE BETTERMENT OF THE WORLD,

    BUT SOMETIMES I FEAR THAT WHAT IF I'M IGNORED ALIKE THE ARTICULAR WORDS.

  • a_heavenly_medicine 17w

    #Let's_Aim

    Let the world blame ,
    Do we render any shame ?
    Such are those criminals lame .
    But now let's unite to change the game,
    List of justice cravers should add no more name .
    Let's show these inhuman creatures the pain of burning in flame .

  • a_heavenly_medicine 17w

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  • a_heavenly_medicine 17w

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