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  • a_man_who_writes_ 5w

    Pc:-Yourquote

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    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 6w

    हलकान-(Worry),मौसम-ए-सरमा(Winter)
    हिजरत(Migration),आमद(Visit)
    बाइ'स-ए-शर्फ़(Cause of Honor),क़याम(Stay)

    अपनी जान को उसकी जान होते देखा है
    मैं अपनी माँ को हलकान होते देखा है

    देखना मुझे जब माथे पर शिकन पड़े मेरे
    खैर छोड़ो तुमने मुझे हर दफा खुश होते देखा है

    इनकी लाश से आ रही है बू, दफ़्न कर दो
    अब बेटे क्या रोएंगे,उन्होंने जीते-जी कौनसा इन्हें रोते दखा है

    मौसम-ए-सरमा क़रीब है,घर की तरफ हिज़रत करो
    मैंने बेघरों को सड़क के किनारे सोते देखा है

    शायद तुम्हे याद ना हो,तुम पर मरता था मैं, और मर गया
    क्योंकि तुम एक मगरमच्छ हो,और मैने तुम्हे रोते देखा है

    जिसकी आमद बाइ'स-ए-शर्फ़ होती है कभी
    चंद दिन के क़याम पर उसे इज़्ज़त खोते देखा है

    मेरी घड़ी में तब शाम के 6 बजे थे 'अमन'
    मैंने पहली दफ़ा उसके साथ होते घड़ी को देखा है

  • a_man_who_writes_ 7w

    जान-ए-रहमत से मोहोब्बत जगाई है,
    जो आग भुजा दे,दिल मे वो आग लगाई है
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 8w

    ©a_man_who_writes_

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  • a_man_who_writes_ 10w

    शय(Thing)
    ज़र्फ़-ए-मय(Capablity of Alcohol)
    मिलकियत(Property)
    वस्फ़(Features)
    तर्बियत(education),गाह(centre)

    हर शय मेरे वश में है,बस तू नही
    पता चलता है इससे,के खुदा मैं नही

    मैं भुला सकता हूँ,सबको पीकर मय पर
    तुझे जो भुला सकूँ,इतना ज़र्फ़-ए-मय नही

    मेरी जानाँ है तू,किसी की मिलकियत नही
    तुझे जो नीलाम करे,ऐसा यहाँ कोई है नही

    सीरत थी उसकी कमाल,मैं वस्फ़ क्या देखता
    निकाह करना था उससे,महज़ सोहबत नही

    मेरा उससे राब्ता एक अरसे से नही हुआ
    पर वज़ह इसकी दूरी है,कोई रकाबत नही

    हमारी तर्बियत हुई है,फक़त इस दुनिया से ही
    क्योंकि दुनिया से बेहतर कोई तर्बियत-गाह नही

    मेरी सुल्ह हो गई है,आज सुबह 'अमन' से
    साफ दिल है मेरा,अब मुझे कोई गिला नही
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 10w

    शजर-Tree
    शदीद-Extreme
    तफ़तीश-Investigation

    मैं सबको छोड़कर आया, तुम्हारी तरफ
    पर तुम बढ़ती आग के जैसे हो,मिरे घर की तरफ

    मुझे भी आग लगानी है अब उसके घर
    ढूंढो, देखो माचिस रखी है, पीछे की तरफ

    तुमसे कहा था, कटवा दो इस शजर को
    हवा का रुख़ है,आज हमारे घर की तरफ

    तुम खाओ जैसे ही कसम मेरे सर की झूठी
    वैसे ही होने लगे शदीद दर्द मिरे,सर की तरफ

    मेरी चैन भरी नींद खोई है, एक अरसे से
    मैंने आता देखा है, उसे तुम्हारे घर की तरफ

    वैसे हमारे मरने की उम्र, तो नही हुई है अभी
    पर एक ज़मीन का टुकड़ा देखा है,तुम्हारे घर की तरफ

    हमे हश्र में मिलना है तुमसे तफ़तीश के लिए
    तुम खड़ी होना कतार में, आगे की तरफ

    वो तुम्हारी तरफ देखती ही कब है, अब 'अमन'
    वो बस तुम्ही हो जो देखते हो अब उसकी तरफ
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 10w

    अहमक़-Fool,अनापरस्त-Egoist,मुआ'शरे-Society
    सोहबत-Meeting,खुशनुमा-Beautiful

    एक अहमक़,बुज़दिल,अनापरस्त से मेरा निकाह है
    हाँ फूलों और इत्र की महक से सजी मेरी कब्रगाह है

    लोग मुस्कुरा कर , कर आए अब दफ़्न मुझे,
    सुना ये है, के कुछ चढ़ावा भी चढ़ा है

    बाबा की इज़्ज़त रखने को इस मुआ'शरे में
    मैंने ना चाहते हुए भी उस सख़्श को हाँ कहा है

    वो कहे सोहबत को या कहे वो सोने को फिर
    मैंने हाँ कहना है, ऐसा घर के बड़ो ने कहा है

    मुझे मेरे बाबा ने हरदम सिखाया है आवाज़ उठाना
    पर अब धीमे बोलना,ये उन्होंने मुझे धीमे से कहा है

    घर मे रही शान से, बाबा की परी मैं अपने
    पर यहाँ किस्से पूछूँ, के मिरे वो पर कहाँ है

    मेरे शौहर जो है वो ढंग से नही पेश आते मेरे साथ
    पर मुझे नही दिखाना है,के मिरे पास भी ज़ुबाँ है

    यही मेरा नसीब है, सोचकर ये मैं 'अमन' से रहलूँगी
    सबको यही दिखाना है, के मरी ज़िंदगी खुशनुमा है
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 10w

    ये कैसा ताल्लुक हमारे गले पड़ रहा है
    वो गैर सख़्श हमसे बेवजह लड़ रहा है

    आंखे तो दुरुस्त है अभी हमारी 'अमन'
    पर उस पर अंधा एतमाद बढ़ रहा है

    मेरी दोस्ती इस जंगल के बादशाह से है
    तू क्यों इन जंगली जानवरों से डर रहा है

    अभी थोड़ी देर है तेरे अपनो के आने में
    तू अभी से ही क्यों खंजर तेज़ कर रहा है

    जो सख़्श भागता है ता-उम्र दौलत के पीछे
    मौत बाद कहाँ उस पर माल-ओ-ज़र रहा है

    मैं खुद हूँ उस फेहरिस्त-ए-गुनाह में शामिल
    तू क्यों फिर अपने वक़्त से पहले मर रहा है??

    मैं उसके माथे की बिंदी का दीवाना हूँ 'अमन'
    उसे देख मुझे दीवाना होने का मन कर रहा है
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 11w

    तेरा जमाल,
    है कमाल,
    देखने उसे,
    मैं खड़ा हूँ,
    छत पर,
    वक़्त-ए-ज़वाल,
    लेकर लबों पर यही सवाल
    के आईने का क्या होता होगा हाल?
    अभी तूने गोश में पहना है झुमका,
    काला सूट और साथ मे चुन्नी लाल
    मेरी धड़कने कभी नीचे कभी ऊपर
    हो ना जाए कहीं अब मेरा इन्तिक़ाल
    तेरी उस मुस्कान ने बेदार कर रखा है
    नही है भूख-प्यास का भी ख्याल
    तू मेरी मोहोब्बत है,बचपन वाली
    अब जवानी को अपनी मेरे लिए संभाल
    हाँ है,तेरा जमाल,कमाल तू मेरी है और
    मैं तेरे इस जमाल का पहरेदार!!
    ©a_man_who_writes_

  • a_man_who_writes_ 11w

    बिस्तर,हवस,तुम और बस,
    तेज़ साँसें,बारिश,हवा और बस

    मकसद,राह,तुम और बस,
    इज़्तिराब,मेहनत,नींद और बस

    रात,अंधेरा,तुम और बस,
    डर,आहट,तेज़ गाम और बस

    पेट,भूख,तुम और बस,
    सुबह दम,काम,खाना और बस

    तकिया,ख्वाब,तुम और बस
    मुलाक़ात,रात,नींद और बस

    कलम, ग़ज़ल,तुम और बस
    इल्म,लहज़ा,'अमन' और बस
    ©a_man_who_writes_