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  • adhura_lekh 10w

    निर्णय

    क्यों कठिन होता है ,"निर्णय"करना
    भविष्य में क्या छुपा है ,इसका भय
    या खुद पे यक़ीन का कम होना
    सामाजिक बंधन या आर्थिक श्थिति
    आप कहेंगे कि ये तो ,व्यक्ति और उसकी
    परिस्थिति पर निर्भर करता है,परिस्थितियों को बदलने में
    समय लगता है और वो समय व्यक्ति का पूरा जीवन या उसके जीवन का महत्वपूर्ण समय ,जिसमे न केवल वो परिस्थितियों को बदल ,बहुत कुछ पा सकता है !
    जीवन बहुत रचनात्मक है हर समय काल में ये बदलता रहा है
    ये परिवर्तन शील है ,फिर
    "निर्णय" लेने से होने वाले परिवर्तन से भयभीत हो ,
    निर्णय को इतना कठिन बनते क्यों है ,
    इसका दूसरा पहलू यह भी हो सकता है कि
    निर्णय लेने से निकट भविष्य की श्थिति, दृघकालिक
    परिणाम से विपरीत हो?


    "सही निर्णय व्यक्ति को कठोर बनाता है,और गलत दुर्बल"
    ये कथन तब तक सही नही है जब तक निर्णय को सही करने के लिए
    उपयुक्त मार्ग और प्रयास न किये गये हो/
    दूसरे अर्थो में हम ये कह सकते है कि निर्णय केवल कुछ ऐसे
    कारको पर निर्भर करता हो जिसको प्रयास मात्र से सही किया जा सकता है तो निर्णय व्यक्ति को उसके गंतव्य तक पहुचाती है

    यदि व्यक्ति के भुतकाल में लिए गए निर्णय व्यक्ति को
    दुर्बल बना चुकी है तो इस श्थिति में निर्णय लेना कितना कठिन
    या कितना सरल होगा?



    "Comment pls"

  • adhura_lekh 10w

    झूठी

    तू झूठी है,,
    शायद थी
    अब मत रहना ,प्लीज
    ©sayaravu