akanshagupta

An architect with artistic hands and writer's words

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  • akanshagupta 1w

    Word Prompt:

    Write a 10 word one-liner on Expectation

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    Why expect from those who you met just months ago!!

  • akanshagupta 5w

    Khafa

    Koi bhi na mujse hai milta
    Shayd khafa hai sb mujse

    Ya shayad me hi khafa hu khud se..

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 5w

    Word Prompt:

    Write a 6 word micro-tale on Overcome

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    Overcoming - A big deal to deal!

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    Word Prompt:

    Write a 8 word short write-up on Impress

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    Impress them to draw out the jealousy fumes.

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    Word Prompt:

    Write a 10 word one-liner on Agony

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    Being half agony & hope for life to go on.

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    Fulfilled

    Ever do you feel fulfilled ??
    Never!

    I asked a group of people, what's that money can't buy??
    The answer was Happiness!!

    And happiness is what evryone wants!!

    Still people wants much money to be happy!!

    IRONY"

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    Word Prompt:

    Write a 8 word short tale on Obsessed

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    Ever obsessed with anger in life for love.

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    One Reason

    I always find a reason to meet,
    Let it be a get together or a treat.

    I recall those canteen shits,
    Hiking eachother backs for a samosa and chips.

    Some Friends send me memes of 1st roll number,
    And reminisce me of the boy who sits beside me was a bomber!!

    I cherish my school days for lifelong,
    With the laces of my shoes tied wrong.

    Those were the days,
    I always chase.

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 6w

    बड़े पापा

    मुझे दादाजी नहीं मिले कभी,
    पर उनके रूप में आप थे यहीं।

    बचपन से आज तक आपसे है मैंने जाना,
    पुराने रिश्तों - नातों का ताना - बाना।

    स्कूटर पर आगे बैठकर सुबह सब्जियां लेने जाना,
    मिलता था समोसा जलेबी खाने का बहाना।

    सब बच्चों से ज्यादा मिला मुझे आपका प्यार,
    और तय रहता था हर डांट के बाद उपहार।

    हर संडे लोंग ड्राइव पर बड़ी मम्मी के साथ पीछे लग जाना,
    फिर लौटते में सबके लिए मटका कुल्फी लाना।

    पुराने दिन जल्दी गुजर गए,
    और जीवन की दौड़ मे हम सब इधर - उधर चले गए।

    फिर बस त्योहारों पर मिलने का बहाना,
    और मोबाइल विडियो काल पर मुस्कुराना।

    याद आयेगा आपके साथ बिताया हर सुख,
    क्यो चले गए आप इतनी जल्दी होकर सबसे बिमुख।

    ©akanshagupta

  • akanshagupta 14w

    पापा

    ```पापा```
    हाँ ! लगता है बुरा जब डाँटते हो आप,
    सुन लेते हैं हम चुपचाप।
    उस समय की डांट से सुधर जातें हैं हम,
    कुछ कर दिखाते हैं हम,
    थोड़ा और आगे बढ जाते हैं हम।

    जब भी मुझे मिलता है कोई अंजान,
    आप ही के नाम से देता है पहचान।
    तब मन ही मन खुशी है होतीं,
    हाँ! हूँ मैं अपने पापा की बेटी।

    जब कभी कुछ हासिल न हो तो लगता है डर,
    पर मम्मी और आपका साथ और आशीर्वाद रहता है हमारे सर पर।

    भले गलती हो मेरी डांट होती थी भैया के लिये सेट,
    कयोंकि आखिर हूँ तो में ही पापा की फैबरेट।

    कभी नही हुआ भेद भाव भैया और मुझमें ,
    ज्यादा ही मिला है मुझे प्यार वाकई में।

    हर जिद होतीं है पूरी जहाँ,
    पापा के साथ मैं रहतीं हूँ वहाँ।

    ©आकांक्षा गुप्ता