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Reposts
  • aman__kumar_ 4h

    हाल-ए-दिल क्या बताऊँ ए मुसाफिर
    हर लमहा हर पल गुमसुम सी हो गई है।
    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 1d

    Love is a never ending work
    Which need trust as raw materials....


    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 2d

    मुसाफिर

    ऐ मुसाफिर
    क्या कहूँ तेरी रूह को
    जिसकी पाकीजगी पर हर वक्त रुक सा जाता है।
    जिसकी कलकलाहट से हर वजूद थम सा जाता है।

    जिसके लिए हर वक्त हर ज़र्रा मुस्कुराता है।
    जिसकी इबादत के लिए हर रूह ठहर सा जाता है।

    जिसकी गुमशुदगी पर हर कतरा रुक सा जाता है।
    जिसके एक इशारे पर हर चीज़ गतिशील हो जाता है।
    क्या कहूँ..........
    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 3d

    Again and Again

    Come here
    Come here again
    In my broken heart
    In my maelstrom dreams
    In my deep fancies

    For wadding love
    In your treacherous heart
    For padding words
    In your unmarked mind
    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 4d

    वक्तव्य

    दुश्मनों से वो लरते
    तलवारों की धार से
    लेकिन मैं लरता हूँ
    शब्दों की बौछार से


    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 5d

    क्या नाम दू मैं उस प्यार को
    जिसके लिए कभी मैं लरता था
    जिसके लिए कभी मैं मरता था
    जिसके लिए कभी मैं आंसू छलकाता था
    जिसके लिए कभी मैं खुद को मनाता था

    हजारों दर्द होते हुए भी
    जिसके लिए मैं मुस्कुराता था
    जिसके लिए मैं नींदो को उराता था

    सब कुछ जानते हुए भी क्यों ना जाना उसे
    सब कुछ समझते हुए भी क्यों ना समझा उसे

    क्या तेरी इस प्रगाढ़ ह्रदय को वो छम्य नहीं था
    या तेरी मनोवृत्ति को रम्य नहीं था

    एक बार अपने लफ्जों को बयां तो कर देते
    एक बार अपनी दिल की दास्तां तो कह देते

    छोड़ देता तेरे वो सपने
    छोड़ देता सबके वो नखरे

    छोड़ देता वो दिल की बहारें
    छोड़ देता वो सपनों की कतारें

    दिल को समझाता बच्चा बन कर
    सबको दिखलाता अच्छा बन कर

    तुझको ना दिखता लड़कों सें घिर कर
    पलकें छुकाता आगे से चल कर

    @writersnetwork@thewingedpen@divya05365 @soni_bhaskar@thesparklingpoetry

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    अल्फाज़

    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 1w

    @writersnetwork
    @thewingedpen
    @soni_bhaskar
    @divya05365




    ऐ खुदा
    तेरी रस्म की रीतियों को माना मैंने
    तुझे ना देखे भी पहचाना मैंने।
    तेरी किस्सों को सच्चाई मान कर
    उसपे चलना हमेशा सीखा मैंने।

    तू अन्त है या अनंत ना जाना मैंने
    तू सर्वत्र है या अत्र-तत्र ना पहचाना मैंने
    बस तुझे स्वर्गाधिपति मान कर
    माथे से लगाया मैंने।

    अब तू ही बता
    क्या तुझे पूजना
    क्या तुझे माथे से लगा के रखना
    क्या तुझे मानना
    खता है मेरी

    क्या तू मुझे इस अन्धकार की इस काली छाया
    के इस भयावह प्रकोप से दूर नहीं कर सकता?
    क्या तू मेरे इस अन्तरात्मा की इस अस्थिरता
    को स्थिर नहीं कर सकता?

    माना मैंने की तूने है बनाया हमें
    तुझी से उत्पन्न और तुझी पे है अन्त हमारी
    तो क्या तू मेरी इस छोटी सी अर्ज
    को स्वीकार नहीं कर सकता।

    -अमन

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    विश्वास

  • aman__kumar_ 1w

    Alleged love

    Conversation of years
    Elucidation of tears
    Dejection of span
    Contradiction of faith
    Now a days
    These are the face
    Of alleged love


    ©aman__kumar_

  • aman__kumar_ 1w

    Grand Pa

    Oh! Grand pa
    Your lessons of humanity
    are pearls for human.
    Your love for animals
    are lessons for human.

    Your deep experience of faith..
    Your deep observation of race..
    show me a path just like a star
    in night with depthness and darkness.

    Your support in goodness...
    Your guidance in worse situations....
    are like a bank of water
    in a dry desert of earth.....

  • aman__kumar_ 2w

    positive /negative

    the mountains of desire
    the thoughts of comfort
    the ambitious life
    can make you
    with positivity
    and destroy you
    with negativity....