amreen786

insaaniyat hi sab se badaa mazhab hai

Grid View
List View
Reposts
  • amreen786 8w

    ज्यो परिवार साथ नही
    त्यो तेहवार खास नही
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 9w

    #MUSKURAAHAT

    मुस्कुराना इस हद तक जनाब
    गर सामने कोई रूठा किसी से हो
    तुम्हे देख भूल जाये रूठना वो
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 10w

    ISHQ AUR
    BEROZGAARI


    इश्क़ एक ऐसा फल्सफा है जो समझ ना सके हम
    बेरोजगारी एक ऐसा मस्ला है जो हल ना कर सके तुम
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 11w

    GURU

    गुरू ज्ञान का सागर
    गुरू ज्ञान की महिमा
    जो मिले मोह उन्से
    उसका हो बेड़ा पार

    निराली उन्की माया
    जग भर दे ज्ञान सारा
    भेदभाव ना कर किसी मे
    समान ज्ञान दे सभी को

    मिली गुरू की छत्र-छाया
    पावन हुए सभी शिष्या
    ना होते गुरू तो क्या था
    जहालत मे डुब्ता संसार था

    आभारी हूं गुरू की मैं
    उनके दिये हुए ज्ञान से
    जग भर मिला सम्मान हमे
    गुरू है तो हम है

    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 11w

    Ishq

    यह इश्क़ हमे तो समझ नही आता जनाब
    इतना जरूर जानते है हम
    कयी हस्ति तबाह हो चुकी
    कित्ने ही आशिक़ गुम्नाम हुए
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 11w

    FUN


    comment section me zaroor batana


    एक बात तोह बातओ.......







    स्कूल के वक़्त हम सब ने prayers मे





    ये कहां.....



    सभी भरतीय मेरे भाई और बहन है।



    तो शादी foreigner से करनी चाहिये????
    क्या केहना है आप का
    do you agree


    ©amreen786

  • amreen786 12w

    जिस तरह बेदार होने पर खवाब टूट जाता है।
    उसी तरह धोका देने पर विशवास टूट जाता है।
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 12w

    Lockdown time

    कैसा यह दौर है इन्सां
    विरान बस्ती हई आबाद घर है
    मंदीर-मस्जिद खाली भरा अस्पताल है
    इस गाँव की सीम बंद है
    उस शहर के लोग कैद है

    कैसा यह दौर है इन्सां
    एक दौर था जब राज फिरंगी का
    आज के दौर मे राज महमारी का
    कुद्रत का क़हेर बाकी है अभी
    बंद कर इन्सां यह खेल आतंक का अभी

    कैसा यह दौर है इन्सां
    आदमी को आदमी से खतरा है
    इस बिमारी का खातमा कब है
    मैने लोग बिछड़ते हुए देखे है
    बच्चे बिलकते हुए देखे हमने है

    कैसा यह दौर है इन्सां
    मजदूर घर जाने को हो गया मज्बूर है
    घर बैठे-बैठे लोग हो गये बहाल है
    गर खुदा है तो बस इतनी इल्तेजा है
    हमरी दुनिया को पहले जैसा बनाना है
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 12w

    बहुत से लम्हे बीत गये जनाब
    यह सोच मे ऐसा क्या करू
    के यह ज़िन्दगी संवर जाये
    मौका मिला कुछ कर गुजरने का
    तो कंबख्त मौत नज़र आयी मुझे

    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786

  • amreen786 12w

    fear

    उस ज़माने मे फोन की घंटी बजती
    खुशी से लोग फौरन चले आते
    आज फोन की घंटी बजने पर
    दिल की धड़कन जोर से धडकती
    न जाने किस्की मौत का संदेश हो
    हर घड़ी हर पहेर मन मे डर होता है
    किस अपने की बुरी खबर आती हो
    रूह कांप उठती यह सोच कर
    अब किस घर मे मातम सुनाई दे
    कोन अपनो से बिछड़ने वाला है
    बर्दाशत की इन्तेहा हो गई है
    अब किसी की मौत देखना गंवारा नही
    यह वक़्त ठहेर क्युं नही जाता
    SHAIKH AMREEN
    ©amreen786