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Reposts
  • aniketrai 8w

    बहुत ये शाम है गहरी,थोड़ा मन भरा सा है
    कहीं एक चीख है चुप सी, कि अब भी ज़ख्म हरा सा है
    कोई आसान सा रास्ता देखकर वो मुड़ गया ऐसे
    मुझे आहट है अब भी कि वो मुझमें बाकी ज़रा सा है।
    ©aniketrai

  • aniketrai 10w

    By unknown writer

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    Kyon na badlu mai
    Tum wahi ho kya?
    Chalo main galat hu
    Tum sahi ho kya?

  • aniketrai 11w

    Aur ek din teri duniya se
    Khud ko wapas bula lunga mai

  • aniketrai 11w

    वो वक़्त की कोई सोची समझी साजिश थी मुझपर
    वो बंजर ज़मीन पर पहली बारिश थी मुझपर।
    ©aniketrai

  • aniketrai 11w

    तुम मिलो तो कुछ बात कर के देखूं
    गर चाहो तो एक मुलाक़ात कर के देखूं।

    चांद बहुत दूर है दीदार मुश्किल है
    दो पल को बैठो तो तुम्हे आंख भर के देखूं।

    देखे हैं यूं तो बहुत चेहरे ज़माने में
    इज़ाजत हो तो तुम्हारी खूबसूरती को सलाम कर के देखूं।

    अधूरे रास्ते, अधूरी ख्वाहिशों से तो ज़िन्दगी वाक़िफ है मेर
    तुम साथ जो चलो तो सारा आसमान चल के देखूं।
    ©aniketrai

  • aniketrai 11w

    By unknown writer

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    Ham aah bhi karte hain to ho jate hain badnam
    Wo katl bhi karte hain to charcha nahi hoti

  • aniketrai 12w

    सज़ा ये है कि बंजर ज़मीन हूं मै
    और ज़ुल्म ये है कि बारिश से इश्क़ हो गया।

  • aniketrai 13w

    That's why I don't share the pain I go through ��

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    Isn't it better to let the dust get only in one eye instead of two.

  • aniketrai 13w

    Remember...This too shall Pass

    When grass is not green on your part,
    And when life seems to be very harsh..
    Like a dark night turns into a beautiful dawn,
    Remember..This too shall pass.

    When everything tastes sour and bitter,
    And when you miss those unfazed laughs..
    Like a difficult road turns into a beautiful stop,
    Remember.. This too shall pass.

    When all your dreams are broken into pieces,
    And when all you can think is the end of path..
    Like a blank canvas can turn into a masterclass,
    Remember.. This too shall pass.
    ©aniketrai

  • aniketrai 13w

    आसमान में ,बहुत ऊंची उड़ती हुई एक पतंग और फिर मेरे हाथ से धागा छूट गया और पतंग का नसीब देखिए कि वो जा गिरी ऐसी बस्ती में जहां लोग भागे उसको पाने के लिए, जिनके लिए महज़ उसको पा लेना ही सब कुछ था। एक बार मिल जाने के बाद वो ये भूल गए कि इसका वजूद उड़ने के लिए है।उसको अपने पास रखने की जद्दोजहद में काट दिए उसके पंख और बना दिया उसको नाकाबिल, एक कागज का ढेर , जो बस ये खुशी दिलाने के ही काबिल बचा था कि वो उनका है, उनके पास है।
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    और जब मैं देखता हूं अपने आस पास किसी लड़की को किसी जूझ से लड़ते हुए तो ये ख्याल मन को कचोटने लगता है कि महज़ ऐसा ही तो है हमारे समाज में लड़कियों का वजूद, "एक कटी पतंग जैसा "। जिसके आसमान में होने का गुमान सिर्फ उस तक ही सीमित है जो इतनी ढील दे कर उसे उस ऊंचाई तक ले गया है और फिर एक दिन अचानक से काट दिए जाते हैं पंख उसके, शादी हमेशा खुशियां ले कर नहीं आती, समझ लिया जाता है उसे भी नाकाबिल, एक कागज के ढेर की तरह या यूं कहिए, एक शोपीस कि तरह जो देखने में तो बहुत सुंदर लगता है मगर कुचल दी जाती है उसकी उड़ान, छीन ली जाती है उसकी आज़ादी। उसकी खूबसूती के बखान में छुपा दी जाती है अपनी कमजोरी और अपना दोगलापन। जिस उड़ान पर नाज़ रहा होगा उसके पिता को, उस उड़ान को समाज ना कभी समझ पाता है और ना ही उसको अपनाने की चेष्टा रखता है। और इसी उधेड़बुन में तोड़ दिए जाते हैं उसके पंख जो शायद आसमान को छूने को बने थे और रह जाती है वो महज़ एक कठपुतली जो हर काम दूसरों कि खुशी के लिए करने लगती है।

    ©aniketrai

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    ©aniketrai