arun_kumar_keshari

एक जागरूक भारतीय कवि

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  • arun_kumar_keshari 8h

    गुलाब ही क्यों बहुत फूल हैं चमन में,
    पर काँटों सा नाता किसी में नहीं है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 3d

    * हमारी खेती *

    कुदरत का रहम है हमारी खेती,
    सरकारी मलहम है हमारी खेती ।

    राह में हाथ मलते रहे बे मौसम ,
    जेब खाली ही रहे हमारी खेती ।

    कर्ज पर टिका है हमारी खेती,
    बिन ब्याही बैठी है हमारी खेती ।

    भूखा सुलाया नहीं हमने किसी को,
    सभी को खिलाया है हमारी खेती ।

    आत्महत्या को फिर मजबूर क्यों ,
    जबाब तलाशती है हमारी खेती ।

    @अरूण कुमार केशरी

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    *हमारी खेती*
    कुदरत का रहम है हमारी खेती,
    सरकारी मलहम है हमारी खेती ।
    राह में हाथ मलते रहे बे मौसम ,
    जेब खाली ही रहे हमारी खेती ।
    कर्ज पर टिका है हमारी खेती,
    बिन ब्याही बैठी है हमारी खेती ।
    भूखा सुलाया नहीं हमने किसी को,
    सभी को खिलाया है हमारी खेती ।
    आत्महत्या को फिर मजबूर क्यों ,
    जबाब तलाशती है हमारी खेती ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 5d

    दिल तो सभी का धड़कता है जब वो दुसरों के लिए भी धड़कने लगे तब उसे दिलवाले
    कहते है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    *नज़्म *
    किसी के इंतजार में हम भी हैं,
    सभी सपने सजाये हम भी हैं ।
    उठा के निगाहें जिधर भी देखो ,
    पलकों में ख्वाब बने हम भी हैं ।
    आँखों का काज़ल बहने न पाये,
    इस झील सी दरिया में हम भी हैं ।
    कश्ती भी तेरे हाथ पतवार भी,
    तूफानी भंवर ,फंसे हम भी हैं ।
    उड़ा दो परिन्दों को आसमान में,
    साथ डूबने को बैठे हम भी हैं ।
    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    जानेमन तू कितना हसीन है ,
    नशेमन तू उतना बदनसीब है ।
    मिलती हो अगर तुम धुएं में ही -
    क्या ख्वाब धुएं में तब्दील है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    आसमान से जब एक तारा टूटेगा,
    दुनिया बचेगी तब न कोई रूठेगा ।
    आओ विध्वंसक हथियार सजाते है -
    कल की बात आज कौन झुठलायेगा ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    मनचाहा सौगात कितना मुमकिन है,
    छालों से पैर का नाता मुश्किल है ।
    फिर भी आओ कदम बढ़ाओ चलते है
    जिद्द मेरी बात फतेह की करते है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    मनचाहा सौगात कितना मुमकिन है,
    छालों से पैर का नाता मुश्किल है ।
    फिर भी आओ कदम बढ़ाओ चलते है
    जिद्द मेरी बात फतेह की करते है ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    *नज़्म*
    कितना बदलें हम अपने आप को,
    कुछ तुम भी बदलो अपने आप को ।
    मुश्किल नहीं अगर इरादे नेक हो ,
    रास्ते मिलते हैं अपने आप को ।
    सब के हिस्से का दर्द समेटे हुए
    अखबार बना दिया अपने आप को ।
    इस जहाँ में कोई मिला ही नहीं ,
    जो पढ़ सके खुद भी अपने आप को ।
    खुद की खुददारी जब सस्ती लगे,
    तब खुदा हि बचाये अपने आप को ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari

  • arun_kumar_keshari 1w

    सिर्फ एक शेर के तहत



    अतीत की बात करना नहीं ,
    मुझे मुकदमा लड़ना नहीं ।

    @अरूण कुमार केशरी
    ©arun_kumar_keshari