ashishakkewar

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  • ashishakkewar 5w

    You and I, we met as two strangers.The two souls in love.But I`ve never considered you as a stranger,I know you since always.Every time I see you I start falling for you and now I am all in you.Walking with you I haven't thought that I will choose this path paved with love and compassion.
    We decided to walk together on the same path.When we choose to be together it doesn't mean everything will bring love and happiness around.Only being in love is not its perpetuity.There might be some conflicts, those conflicts shouldn't destroy what we have built. Because we have come long away.We know that we both love each other but saying I love you is the only thing that makes our love eternal? For me, all I need is your compassion,belief, and your being with me.When we start to take stand for each other against the conflicts instead of blaming then and then only we can grow our relationship fonder.It might be crazy for you but my love we should fall for each other every single day and what we have deep inside is imperishable.
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 8w

    राह मे चहेरे देखे कहि
    रूह सिर्फ तुझसे जा मिली
    वो नकाब थे सुहाने सारे
    इनायत तेरि हसि मे मिलि
    खामखा प्यार तलशते रहे
    बेलौस मुहब्बत तुने हि दि

    आंखे तो हमने कहि थी पढि
    नज़र नजाने क्यु तुमसे जा मिलि
    पढनी जो चाहि आंखे तुम्हारि
    थामे बैठी थी अल्फ़ाज़ो के मोती
    जब आस रखि इन्हे साथ पिरोने कि
    साज़िश हुइ तुम्हारे साथ उलझने कि
    क्या तुमने कभी समझि हैं
    गेहराई इन पंक्तियों कि?
    क्या मेहसूस कि हैं
    परवाज़ मेरे दिल की?
    क्या तुमपर हुइ है इनायत
    इनके अर्थ कि?
    रखते है मुराद कुर्बत-ए-एहसास कि
    जो बेनज़ीर हो,ना मांगु मिजाज़ी
    ये मुहब्बत-ए-हक़ीक़ी हयात अब
    तुझसे हि होगी
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 16w

    मुसाफ़िर

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    चलना जानता हूँ
    हर मोड मलंग चलता हूँ
    तु सीख है हर मोड कि
    तुझे सिखना जानता हूँ
    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    चलना जानता हूँ

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    निगोडे मौसम सा दोगुला
    समाज देखता हूँ
    क्षितिज के पार उस रोशनी
    को पेहचानता हूँ
    बिखरते दूबते उस रोशनी संग
    बदलते समाज का रूप देखता हूँ
    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    मौसम के साथ बदलना जानता हूँ

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    वक़्त के साथ गिरना जानता हूँ
    बीते वक़्त मे ढलना और दीपक
    संग चलना जानता हूँ
    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    हर वक़्त चलना जानता हूँ

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    मै लबो पर दूध से जाम
    तक का सफ़र देखता हूँ
    ज़िन्दगी के दलदल में
    सपनो को गलते देखता हूँ
    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    मै सब सेहना जानता हूँ

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    समय के साथ सम्यक होता हूँ
    हर एक बढाव मे ज़िन्दगी के
    पढाव मे सुझाव सा हूँ
    पर वक़्त के किसि छोर पे
    मै रुकना भी जानता हूँ

    मुसाफ़िर हूँ ज़िन्दगी का
    मै हर पहलु अपनाता हूँ
    ज़िन्दगी के तपिश तले
    हिरे सा बन आता हूँ
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 17w

    सवाल जो हर वक़्त आता है
    दूर किसि छोर से कोई बुलाता है
    ये कौन है जो मेरि हर बात का
    जरिया बन जाता है
    जो देता आगाज़ किसि के
    मौजूदगी क है

    कभी अतीत के पन्ने बन
    दस्तक दे जाता है
    जताता है कि सब जानता है
    वो आवाज़ मुझे बांधे रखता है

    राह मे गर मै भटक जाऊ
    ये शमा बन आता है
    हर बातसे उभरने कि आस देता है
    ये आवाज़ मेरा भरोसा है

    आवाज़ वो हर वक़्त साथ है
    देती सबूत मेरि मौजूदगी का है
    आवाज जो वक़्त के दूसरे छोर
    कि मेरि अपनी कहानी है
    हर वक़्त मे ये मेरि मौजूदगी
    का एहसास है
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 23w

    Pyar,Ishq,prem ye dhai akshar sunne me jitne mithe lagte hai na unhe nibhane ka safar utnahi kadwaa aur kathin hota hai.Ham chahe iske liye kitne bhi mukammal kyu na ban jaye ye apni khamiyaa dhondhne ki aadat se baaz nahi aata aur batayi in khamiyo ko bharna hamari jaroorat ban jaati hai. Inhi jaroorato ko poora karte karte ye apne dayre kuch is kadar badha leta hai ki ise sametate sametate humare antarman,aatmavishwas aur aatmasamman ke anginat tukde hokar bikhar jate hai.
    Mai is shaher me naya tha jab hamari pehli mulaqat hui thi. Mai kafi had tak shant kism aur gair-dost tarike ka insaan tha jise logo ke saath rehna tak pasand nahi tha aiseme baat karna to dur ki baat hai.Par aakho ka safar musalsal chalta hi tha bina kisi rukaat ya thakaan ke. Aisehi jab ek subahe tumane himmat karke aakho ke us safar ko labzo me tabdil karte huye mujhse pen manga to bina ha ya na kahe maine nazre girate huye tumhe pen de diya. Poore lecture ke dauran man me bas yahi ghamasan chal rahi thi ki ab pen de to di magar lautate waqt kya bolunga. Class khatam hui aur waha se bhagne ki hadbad me pen reh gayi ya tumne wo jaanbujh kar na diyi ho.Pahele pahele hamara milna jaise kisi ittefaq se kam nahi tha aur badme yahi ittfaq aadat ban gaya tha. Aakho ka safar to mano hame labzo jyada azeez tha,wo kehte hai na pyaar labzo ka mohtaaj nahi. Baat karni hi ho to hamare labzo ko ek doosare ke paas pochane ka kaam hamare beech ke kabotar matlab hamare dost kar diya karte the.Isi beech shauk aur aadate pata chalne lagi thi jinme ek shauk mano hame milane ki sajish me laga tha.Kavitao ka shauk aur isi shauk ne kafi lamhe is dil ki dibbi ko diye the jo mujhe aaj bhi ajeez hai. Mai apni kavitaye ek diary me likhta tha aur ek roz unhe padhne ke liye wo diary tum ghar le gayi thi. Ye sab tumne socha tha ya fir mahej ek ittefaq tha. Kyu ki us diary ke pichale panne se hi pyar ki musalsal shuruwaat hui thi and this was my first love letter. Aadato se kaafi juda hone ki wajah se nok-zok chalti rehti thi lekin har us marz ki dawa tum saath rakhti thi.Tumhare saath haste khelte wo do saal kaise beet gaye pata hi nahi chala. Class topper honeki wajah se laazmi tha ki raahe bat jayegi to aiseme hamne distance relationship rakhne ka tai kiya. Lekin visual aur virtual duniya me kafi fark hota hai. roz call par baat hoti to thi magar ab wo call kaam jyada lagne laga tha. Baat kuch is kadar badh gayi ki ab dono ke bich blackmails,gaaliya aur shak inke alawa kuch nahi bacha tha aur aiseme ek mulaqat jaroori thi. Us roz tumhara milne aana mano ek chubhan sa tha, bolne ke liye kuch bacha nahi tha kyu ki jo alfaaz hame kareeb laye the wo aaj bas jaher ghol rahe the. Shaher ke us shor me ek chuppi si thi,mai har us gujarti hawa ko mehsoos kar pa raha tha jo tumhari bikhri lato se lekar mere chahere tak aa rahi thi. Din ki us dhoondhli sham me tumhare aakho me mere liye wo dard wo ishq mujhe dikh hi nahi raha tha. Ab jab tum janeke liye mudi to dilne ek hi baat kahi scilent claps for you,very well played.Mujhe pata tha ki un chand salo me maine jo kuch bhi mehsoos kiya tha wo shayad hi kabhi kar paunga lekin har us bitaye lamhe ko mehsoos karna hi mere pyar ko mukammal kar raha tha. Aaj lakh ranjisho ke bawajood ham unki tasweero ko dekhkar apni yade taaza kar lete hai aur khuda se ek hi dua mangte hai ki firse mulaqat na ho. Kyu ki apna dil aur pen mangne ki himmat shayad aaj bhi mujhme na ho.
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 24w

    सावन सा ये रिश्ता है
    मुकरना इश्क़ का रिवाज़ है
    दुनिया कि नज़र मेे नापाक है
    फ़ैसला सही-ग़लत का ये करते है

    तुझसे दिल ये जुडा है
    नाम दिलपर लिखा है
    लेकिन प्यार के उस रिवाज
    से ये खुद ही अलहयदा है
    ज़ुल्म ये मेरे हिस्से लिखा
    ऎ-खुदा क्यु है

    गर हर घडी खुदा तेरा साथ है
    दुनिया कि सोच रखति
    मुझसे बाईद है
    चाँद ये मेरा कभी आसमा
    मे ना हो
    सायो सी रातो का मुर्शिद
    तु हो

    प्यार कि दुआ हु लिये
    ना थुकराना मुझे
    या उसे लौटा दे या
    बरि कर अब मुझे

    गर हर घडी खुदा तेरा साथ है
    दुनिया कि सोच रखति
    मुझसे बाईद है
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 24w

    तुम वो हो जो मिलो कि दुरि से भी
    मेरे दिल की बात समझते हो
    क्यु कि दिल को दबाये, बातो को
    दफ़्नाये चलना पसंद करता हूँ

    तुम वो हो जो नज़रो से दिलका रास्ता नापते हो
    वो जो मेरे शब्द महेज खामोशि से समझते हो

    तुम वो हो जो दिलमे मुसाफ़िर से आए हो
    दिल जो हर तरफ़ से टूटा है
    जिसकि हर दीवार मैल खायि है

    तुम वो हो जो मुझे शब्दों मे मिले हो
    वो जो मुझे मुझसे जानते हो
    नकी अल्फ़ाज़ कि रचनाओ से

    तुम आइना हो जो मुझे अपना अक्स दिखाता है
    वो सच जिसे दुनिया देख नहि पाती
    वो जिसे मै कभी समझा नहीं

    तुम मुसाफ़िर हो दुनिया के राहो मे
    ये दिल उसका ठिकाना नहीं
    ज़रा थमकर मिट्टी हटा कर तो देखो
    ये दिल आज भी एक आशियान है
    जिसमे दर्द है,इश्क़ है,उठ खडा होने
    को क़ाबिलियत है
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 28w

    काश के तुम मुझे अपना पाते
    मगरूर अपनी आशिकि पर हम भी होते
    काश ये दिल तुमसे जुडा होता
    मेरे हिस्से भी शाद लम्हे होते
    काश कि उन आँखो मे कोइ जगाह होती
    तस्वीर निहारते रात ना गुजरि होती
    काश तुम्हारि बातो मे मेरा ज़िक्र होता
    वहशत के ये नज़ारे आज ना होते
    काश के आइने मे तुम्हारा अक्स ना होता
    खड़ी आइने मे आज बेगैरते ना होती
    काश तुम दुनिया छोड़ मुझे अपनाते
    शबभर हि सही हम जीना सीख जाते
    दिलमे अरमानोका समशान ना बनाते
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 30w

    फ़िर मिलेंगे ये वादा है
    कैसे और कहा ये
    कायनात का फ़ैसला है
    पर अक्स एक दूसरे मे
    अब भी ज़िंदा है

    जो हर सवेर तेरे stethoscope
    से मेरि धड़कन सुनाता है
    जो मुझे तुझमे ज़िंदा रखता है
    फ़िर मिलेंगे ये वादा है
    कैसे और कहा ये
    कायनात का फ़ैसला है

    मेरी कविताओ मे एक अंजान
    रचना बनकर उतरता है
    जो तुझसे शुरु और खत्म होता है
    फ़िर मिलेंगे ये वादा है
    कैसे और कहा ये
    कायनात का फ़ैसला है

    हर शाम एक इंतज़ार बनकर
    जो मेरे खिड़की से झाकता है
    तेरे गुजरने पर दौड़ उठता है
    मेरा वो अक्स यही केहता है
    फ़िर मिलेंगे ये वादा है
    कैसे और कहा ये
    कायनात का फ़ैसला है

    मुझे ये लगाव अब तो ना होगा
    पर हर लम्हा मेरे साथ रहेगा
    ये जनम तो युहि बीत जायेगा
    वक़्त के आड जिस्मभी पिघलेगा
    बस एहसास तेरा मेरे साथ रहेगा
    वो लम्हा वक़्त कि सुई मे पिरो देगा
    बाकि कुछ पता तो ना होगा पर
    हम फ़िर मिलेंगे ये वादा है
    कैसे और कहा ये
    कायनात का फ़ैसला है
    ©ashishakkewar

  • ashishakkewar 42w

    तेरे इश्क़ का मुसाफ़िर
    मै भटकता रहा
    तु मुसलसल शहेर सा
    बदलता रहा
    ©ashishakkewar