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  • asutoshbehera_dj 16w

    उस प्यारे जिस्म से
    मोहब्बत की रुह निकल गई।
    मेरे जज्बातों को ठुकरा कर
    वह यू निकल गई।।
    वह कहती थी मत जाओ,
    ये कहते-कहते
    वह खुद निकल गई।

    ©asutoshbehera_dj

  • asutoshbehera_dj 31w

    जाम एक नशा है सुना था,
    आज दोस्ती का जान चख रहा हूं।।
    हां भुला दूंगा वह सारी यादें,
    अरे मैं क्या सपना देख रहा हूं।
    ©asutoshbehera_dj

  • asutoshbehera_dj 48w

    तेरे खयालों की आबो हवा में रहते हैं।।
    ना जाने क्यों??
    तेरे लिए जीते हैं और तुझ पे ही मरते हैं।
    याद आई तेरी इस कदर
    कि मेरा दिल भी रूठ गया।।
    तेरे ख्यालों की बस्ती में घूमते-घूमते
    मेरा जहां लुट गया।
    और कभी कभी,
    याद आती है रूप रंग चाल तेरी।।
    साला रास्ते में जिसे देखुं कहूं ,
    देखो जा रही है हुस्नजवा मेरी।
    एक दिन तो मैंने खुदा से भी पूछ लिया, बता?
    अब वह मेरे ख्वाब खयालो में समाई है।।
    लेकिन हमारे लकीरों में।
    तूने यह दुखी दास्तां क्यों लिख वाई है?
    रह रही है वह ख्वाबों को जलाकर दूर मेरे।।
    फिर भी तू क्यों चुप है देखकर प्रेम को मेरे ?
    खुदा:- थोड़ा सब्र कर सब्र का फल अवश्य मिलेगा ।।
    यह तो प्रेम का नूर है यह जरूर खिलेगा।
    ©asutoshbehera_dj

  • asutoshbehera_dj 50w

    इंतजार

    दो घुट पी लेता हूं जब तेरी याद आती है।।
    अरे यह जाम ही तो है,
    जो सबको अपनी औकात दिखा जाती है।
    सोने से पहले तेरी तस्वीर देख लेता हूं।।
    तू लौटेगी जरूर ये ख्वाब सजा लेता हूं।
    अचानक से एक आवाज आती है और कहती है!!
    तेरे अंदर तो मेरा रूह बसता है यह रक्त मान से बना जिस्म किस काम का।

  • asutoshbehera_dj 50w

    प्रेम की सच्चाई

    अंज़ाम से डरने वाले कभी
    मोहब्बत नहीं करते।।
    वह जिस्म के प्यासे कभी
    रूह की अमृत को पिया नहीं करते।
    ©asutoshbehera_dj