bs_yu_hi

bs yu hi ek khyaal aya, aur bs yu hi mai likhne aa gya.

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Reposts
  • bs_yu_hi 12w

    *
    हुस्न-ए-ताम - perfect, complete beauty
    कहकशाँ - galaxy
    रहगुज़र - path, road
    रुत - season
    छब - style
    फ़ज़ा - ambience

    #hindi #poem #poet #nazm #faraz #incomplete #thought #amdfrz

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    भली सी एक शक्ल थी

    भले दिनों की बात है
    भली सी एक शक्ल थी
    न ये कि हुस्न-ए-ताम* हो
    न देखने में आम सी
    न ये कि वो चले तो कहकशाँ* सी रहगुज़र* लगे
    मगर वो साथ हो तो फिर भला भला सफ़र लगे

    कोई भी रुत* हो उस की छब*
    फ़ज़ा* का रंग-रूप थी
    वो गर्मियों की छाँव थी
    वो सर्दियों की धूप थी।

  • bs_yu_hi 12w

    Be true. No Google search allowed.
    #hindi #poem #poet # sher #guess #quiz

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    Guess this famous poet.

    उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
    वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

    ~ ?

  • bs_yu_hi 13w

    हयात - Life
    लज़्ज़त - taste
    लज़्ज़त-ए-हयात - relish of life

    #hindi #poem #poet #pod #urdu

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    जौन एलिया

    है मोहब्बत हयात की लज़्ज़त

    वर्ना कुछ लज़्ज़त-ए-हयात नहीं

    क्या इजाज़त है एक बात कहूँ

    वो मगर ख़ैर कोई बात नहीं

    ~जौन एलिया

  • bs_yu_hi 13w

    कहकशाँ - Milkyway, Galaxy

    #hindi #sher #poem #poet #pod

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    मुस्तफा

    इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ
    मेरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

    ~मुस्तफा

  • bs_yu_hi 13w

    सामने है जो..

    सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं 
    जिसको देखा ही नहीं उसको ख़ुदा कहते हैं 

    ज़िन्दगी को भी सिला कहते हैं कहनेवाले 
    जीनेवाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं 

    फ़ासले उम्र के कुछ और बढा़ देती है 
    जाने क्यूँ लोग उसे फिर भी दवा कहते हैं 

    चंद मासूम से पत्तों का लहू है "फ़ाकिर" 
    जिसको महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

    ~सुदर्शन फ़ाख़िर

  • bs_yu_hi 13w

    Remembering Past

    Not all that's left behind is ment to be forgotten.

    ©bs_yu_hi

  • bs_yu_hi 14w

    फ़रहत एहसास

    इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
    अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

    ~फ़रहत एहसास

  • bs_yu_hi 14w

    बहादुर शाह ज़फ़र

    कोई क्यूँ किसी का लुभाए दिल, कोई क्या किसी से लगाए दिल
    वो जो बेचते थे दवा-ए-दिल वो दुकान अपनी बढ़ा गए

    ~बहादुर शाह ज़फ़र

  • bs_yu_hi 14w

    अहमद फ़राज़

    रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
    आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

    ~अहमद फ़राज़

  • bs_yu_hi 15w

    गुलज़ार

    दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई,
    जैसे एहसान उतारता है कोई,

    आईना देखकर तसल्ली हुई,
    हमको इस घर मैं जानता है कोई,

    पक गया है शजर पे फल शायद,
    फिर से पत्थर उछालता है कोई,

    देर से गूंजते हैं सन्नाटे,
    जैसे हमको पुकारता है कोई|

    ~गुलज़ार