chitkit

POEMS WRITTEN 342 ENGLISH+HINDI NATIVE CITY JODHPUR EDUCATION AJMER CITY RESIDING HISAR HRY BORN BIKANER CITY 07-05-19XX chitkit@rediffmail.com

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  • chitkit 9h

    किस्मत/रेखा।

    जबसे तुझे देखा है
    हमने देखनी छोड़ दी ,
    किस्मत की रेखा है।

    तेरे चेहरे का नुर
    कुछ ऐसा है,
    चाँद-सूरज की
    रोशनी का हाल भी
    न अब वैसा है।

    ठंडी हवा जब भी
    चलती है,
    तो मदहोश करती
    तेरी खुशबू भी
    उडा़ लाती है।

    तेरी आँखों की चमक
    तो गजब है।
    सितारों की रोशनी
    से तो अजब है।

    मंदिरों की घंटियाँ हों
    या फिर
    तेरी आवाज,
    मंत्र-मुग्ध से हम क्यों?
    सारे संसार का है अंदाज ।

    या तो किस्मत
    कि रेखा है।
    या फिर तुझको
    ही देखा है।
    ©chitkit

  • chitkit 22h

    दीवार या द्वार ।

    जब सामने खडी़ हो
    मुसीबतों की दीवार,
    आओ हम ढूँढ़ लें,
    संभावनाओं के द्वार।

    राहें कठिन होंगी ,
    बाधाएं होंगी असीम।
    फिर भी हमारा,
    जीत पर है अधिकार।

    उत्साह की गगन-चुँबी
    लहरों में बहना होगा।
    हार को जीत में,
    बदलना होगा।

    नयी राहों की
    तलाश होगी।
    हर तलाश,
    बेमिसाल होगी।

    सूरज की प्रखर
    किरणों जैसे,
    हम करते जाऐं
    निरंतर कदम-ताल।

    सहन करते जायें,
    हम हार का प्रहार।
    तभी मिलेगा हमारे मन को,
    एक नयनाभिराम सँसार।

    जब सामने हो
    संभावनाओं के द्वार,
    आओ हम गिरा दें,
    मुसीबतों की दीवार।
    ©chitkit

  • chitkit 2d

    मौसम !

    हर पल रंग
    दिखाता मौसम।
    ठंड से सिहरा देता,
    गर्मी से झुलसाता मौसम।
    प्यार-भरे दिलों को,
    धड़का जाता मौसम।
    दिलों में बहार,
    ला देता मौसम।
    कभी धूप की
    उज्जवलता,
    कभी बर्फ की ठंडक ,
    बिखरा देता मौसम।
    कभी धूप की
    आँख-मिचौली,
    कभी बरसात की,
    भीगी हुई सुबह
    ला देता मौसम।
    कभी धुँध की
    चादर लपेटता,
    कभी धूप की चमक,
    दिखा जाता मौसम।
    आँखों में सपने सजाता,
    आँखों में रंग,
    भर जाता मौसम।
    फूलों के रंग,
    बिखेर देता चारों ओर,
    फूलों की खुशबू ,
    उडा़ देता मौसम।
    हर पल रंग,
    दिखाता मौसम,
    हर दिल को
    भरमाता मौसम।
    ©chitkit

  • chitkit 3d

    THIS POEM SHOWS THE REAL IMAGE OF PAKISTAN. WHY IT WAS CREATED BUT WHAT IT HAS BECOME. JUST A STOOGE IN THE HANDS OF CHINA THE LAND GRABBER AND THE BEGGER.

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    मोमबत्तियाँ

    बुझा दो मोमबत्तियाँ,
    की अब सहानुभूति की दरकार नहीं।
    जिस माहौल की आत्मा
    हो विषभरी और कलुषित,
    उससे अब हमें सरोकार नहीं।

    सोचा था ,साथ चलेंगे ।
    एक सशक्त राष्ट्र निर्माण करेंगे ।
    मानव मात्र के दुख को हर लेंगे ।
    साथ मिलकर सब कष्ट सह लेंगे ।

    सब आदर्श बेकार गये।
    हर बार हमारी पीठ पर वार नये।
    आँखों में लालच भर लाये।
    रिश्तों में क्रूरता भर लाये।

    पाक-भूमि मांगी थी,
    पर नापाक इरादे दिखा दिये।
    जन-जन में घृणा का जहर भरा,
    आतंक के पंजे दिखा दिये।

    धर्म के नाम पर,
    प्राचीन अस्मिता को डुबा दिया।
    शत्रुओं के साथ मिलकर,
    मित्रता और विश्वास को ढ़हा दिया।
    एक ही आत्मा को विभक्त कर,
    राष्ट्र-द्रोह का चेहरा दिखा दिया।

    जिस माहौल की आत्मा,
    हो विषभरी और कलुषित,
    उससे अब हमें सरोकार नहीं।
    बुझा दो मोमबत्तियाँ,
    की अब सहानुभूति की दरकार नहीं।
    ©chitkit

  • chitkit 4d

    काश !

    काश !
    सपनों में रंग भर जाते।
    उड़ने को पंख मिल जाते।

    काश !
    समय के "वो" पल,
    बंद मुठ्ठी में रह जाते।

    काश !
    आँखों की मूक भाषा
    एक बार तो पढ़ लेते।
    संगीत लहरियाँ गूंज उठतीं,
    अनेक गीत अमर हो जाते।

    काश !
    जीने की उमंग होती।
    हरियाली के झरने होते।
    दिलों की पुकार होती ,
    कुछ "पल" अपने होते।

    काश !
    रंगोमय उडा़न होती,
    सपनों के पंख होते।
    ©chitkit

  • chitkit 5d

    क्यों ?

    क्यों नींद से उठा कर
    नजरों को हिला दिया ?
    हृदयों को धड़का कर
    क्यों फिर रुला दिया ?
    खोल समय की तिजोरी
    चँद सुनहरी यादों को,
    क्यों फिर से उडा़ दिया ?
    चुपचाप थे, तन्हाई थीं
    क्यों शोरोगुल से,
    ये आसमाँ गूंजा दिया ?
    जिनको भूल चुके,
    उनकी यादों को,
    क्यों फिर से जगा दिया ?
    ©chitkit

  • chitkit 1w

    एक दिलरुबा

    एक दिलरुबा की तलाश थी।
    एक दिलरुबा की तलाश है।

    हों , चेहरे पर मुस्कराहटें
    जैसे खिलें अनेक
    फूल पलाश हों।

    सदाबहार गीतों की आवाज हो।
    सीपी जैसे लब खुलें
    तो लगे जैसे,
    बज उठें कहीं
    अनेक मधुर साज हों।
    उड़ती खुशबूओं का अहसास हो।

    एक दिलरुबा की तलाश है।
    एक दिलरुबा की तलाश थी।
    ©chitkit

  • chitkit 1w

    एक सुबह/सूरज

    सुबह का सूरज।
    सूरज की धूप ।
    धूप की गर्मी।
    गर्मी से बहता/
    पसीना/सुखाती,
    ठँडक बिखेरती,
    पेड़ों की छाँव।
    छाँव में टहनियाँ,
    टहनियों पर घोंसले,
    घोंसलों में पँछी।
    पँछियों का चहचहाना,
    भर लें आँचल में,
    यादों का खजाना।
    अपना-सा लगे,
    आज यह जमाना।
    ©chitkit

  • chitkit 1w

    मौसम गुजरते रहे

    मौसम , बदलते रहे।
    लोग , गुजरते रहे।

    अनेक युग गुजरे।
    यह दुनिया भी
    बदलती रही।

    हवायें , सहलाती रहीं।
    कदम , नये डगर
    की ओर चलते रहे।

    कारवाँ से उड़ती धुल,
    फिर-फिर ,
    पथ पर हीं बिछतीं रहीं ।

    लोग , बदलते रहे।
    मौसम , गुजरते रहे।
    ©chitkit

  • chitkit 1w

    मन तो पंछी है ।

    जो मन ने सोचा,
    वही किया।
    जो मन ने कहा,
    वही लिखा।
    जो मन ने चाहा,
    वही लिया।

    मन की उडा़न,
    आकाश की असीमित
    ऊँचाईयों तक।
    मन की डुबकी,
    सागर-तल की अतल
    गहराईयों तक।

    मन की स्वतंत्र इच्छा,
    मनुष्य-मात्र की स्वतंत्रता ,
    की पराकाष्ठा।
    स्वयं की मर्यादाओं
    से निर्धारित,
    मन की अनियत्ंत्रित
    कल्पनातित उडा़न को
    न रोको।

    मन तो पंछी है,
    उड़ता ही जायेगा।
    मन की कल्पना तो,
    इस स्प्वनीली दुनिया को,
    हर इन्द्र-धनूषी रंगों में
    डुबोता ही जाएगा।
    ©chitkit