dashrathssbhati

Untolled feelings

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  • dashrathssbhati 11w

    ये टुकड़ो में धूप है न शायद तुम्हारे साये से छूट गई होगी ,
    मुझे पता है बहुत दिनों तक कुछ नहीं चलता मेरा भोलापन तेरी सादगी सब थोड़े ही चलता है ,
    एक ख़्वाब , दो नैना , औऱ यह जीवन
    इतना ही तो था ,
    सब छूट गया , क्यों है न, में अकड़ू हु , बस मालूम तो चला तेरे जाने के बाद । #सर्द_बारिश_औऱ_याद
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 14w

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  • dashrathssbhati 14w

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  • dashrathssbhati 14w

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  • dashrathssbhati 14w

    इतना जल्दी वादा न कर,
    इतना जल्दी इरादा न कर ।
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 14w

    मुकाबलों में माहिर थी ज़िन्दगी,
    भूल गए उसके क़ाबिल थी ज़िन्दगी,
    दर्द कहता हैं जी ले ज़िन्दगी ,
    दौर गुज़र गया अब कहाँ हैं ज़िन्दगी ।
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 14w

    जब ज़रूरत हो कह दिया दोस्त ,
    वरना लोग दोस्त कहना छोड़ देते हैं ,
    जिसको जरूरत हो मय की ,
    वो जाने क्यों मयखाना छोड़ देते हैं ,
    नये पत्र नहीं आते आज कल ,
    चलो पुराने पत्र पढ़ना छोड़ देते हैं ,
    याद के सिवा कुछ बचा ही नहीं,
    चलो अब याद करना भी छोड़ देते हैं ।
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 15w

    एक दिन औऱ जिन्दगी के नाम ,
    एक दिन औऱ फ़िर तेरे नाम ।
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 15w

    मौर घर पे मुस्कराते हैं ,
    तो अच्छा लगता हैं ,
    कुछ ख़्वाब सच हो जाते हैं ,
    तो अच्छा लगता हैं ।
    ©dashrathssbhati

  • dashrathssbhati 15w

    प्रातः घर पर मौर ,
    पर दिनकर ने पँख पसारे,
    निकट ही प्रिय पीपल,
    मग़र तशवीर से ओझल,
    जैसे जीवन से इंसानों में अनुराग,
    दुर्लभ सा जाने क्यों?
    द्वार पर गौ खड़ी बहुत सी ,
    क़रीब ही एक पुरानी,
    पिताजी की प्रिय मोटर गाड़ी,
    अभी आरती गूँजे मन्त्र मुग्ध करती,
    मन्दिर प्रांगण से ,
    यह सँगर्षो का घर ,
    हम तीनों भ्रात कर्मयोगी,
    मातृ - पितृ प्रेम भोगी,
    ले कर आराधनाओं को,
    चल दिए चहु दिशाओ को ।
    ✍️ दशरथसिंह भाटी ।

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    ©dashrathssbhati