debabratabiswal

MEDICO at S.C.B MEDICAL COLLEGE, CUTTACK,ODISHA.

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  • debabratabiswal 12w

    The night’s subconscious....

    The moon cascades down the starry sky,
    Shimmering bright on a field laden with rye
    As the owl ascends listening to the robin’s cry
    Kids drowse away heeding their mother’s lullaby.
    Echoes dim down creating a realm of silence
    While nature and beings form a stout alliance
    Limiting the infuriation of clamouring sirens
    Diluting the agitation, sustaining the balance.
    Stepping into the dimension of one’s creation
    We create fantasies those devoid imagination
    Living each moment through a fleet of pulsation
    We dream to mould each into life’s narration.
    The night goes deep, as dawn begins to creep
    Sleepy eyes struggle to take in the giant leap
    Awaiting to set on a journey too far and steep
    One sets the narration to take a giant leap.

  • debabratabiswal 13w

    When passion and lechery met,
    No prophylactic was used,
    The Virus found its root,
    Making the person look like a coot.
    As the sun can't part from the sky,
    So shall it stay,
    With the feeling of villainous each day.
    When HIV destroys so many of your cells,
    You cognize the blunder going on in your cells.
    Owner of one million dollars or one cent,
    None are reprived,
    Ready to come when a man and a women swive
    We should never judge another in the society
    With thoughtless words or deeds,
    For we all have within us,
    Wounds that have made us bleed..
    Being the 4th biggest killer worldwide
    The numbers keep rising horrified
    Yet to some its just another sexually transmitted disease.
    Its upto us to stop the spread of HIV,
    be safe and end prejudice.
    Ask yourself, "Are 20mins of unprotected thrills worth a life time of pills ?”

  • debabratabiswal 13w

    THINK GLOBAL, ACT LOCAL !

    In India the first rule of Sex is not to talk about it.
    We live in a country where talking about Sex is not considered good
    and talking about Sexual Health is not considered healthy.
    Hello!We live in 21st century!
    Stop believing in myths and
    stop raising taboos over Sexual aspects.
    Stop isolating AIDS patients from the society, talk to them,
    try to understand their pain instead creating fun of their suffering.
    Create Awareness !
    That's the least you should do!EDUCATE YOURSELVES

  • debabratabiswal 16w

    HAPPY CHILDREN’S DAY !!

    A day summoned to tender petals of humanity
    To rise in life and shine amidst vanity
    To those whose innocence guides the path of wellness
    With a smile on their faces and an aura to bless.
    Splashing squeezing and spilling the jar of happiness
    They are the little ones , full of craze
    A thousand questions yet an energetic maze
    Children's are truly the idols to praise.

    The blowtorch of cuteness to the pallbearers of responsibility
    The illuminated youth that reunites the sanity
    The tiny ones to make your day bright
    This day is all about younger ones ,
    Charming ones spreading heart's delight
    ©debabratabiswal

  • debabratabiswal 22w

    वृक्ष

    सिर्फ मेरे लिए वृक्ष फल,छाया,ईंधनौषधी नहीं देते ,वो सब को एक प्यार दुलार देते है ,
    फिर क्यों उन पर जन ध्यान नहीं देते,
    वो दिन प्रतिदिन अपनी संख्या खोते है,
    सिमट रही है हरियाली जंगल उजड़ रहे है,
    भलाई करने वालों का अस्तित्व मिट रहा है,
    प्राणवायु देने वाले आज प्राणों को लड़ रहे है,
    धरती की हरियाली हट रही है गर्मी बड़ रही है ,बादल भी अब कुछ सुनते नहीं मन की कर रहे है,
    कहीं वर्षों का सूखा कहीं बाढ़ से मर रहे है,
    संतुलन डोल रहा है ,
    भूमि का महामारी बड़ रही है,
    पेड़ लगाओ मिलकर सारे हरियाली घट रही है,
    एक पेड़ जीवन का लक्ष्य बना लो बड़ा तो नहीं है ,वसुधा हरी हो जायेगी यह सबका कर्त्तव्य है ,सजा नहीं है।

  • debabratabiswal 23w

    ମୃଗତୃଷ୍ଣା

    ନିଶବ୍ଦ ଏ ଅମାବାସ୍ୟା ରାତି !
    କୋହରେ ଥରିଉଠେ ଛାତି !
    ଛଳ ଛଳ ମୋର ନୟନ ଯୁଗଳ,
    ହୃଦୟେ ଚାଲିଚି ପ୍ରଶ୍ନ କୋଳାହଳ।

    ପୁଣି ପ୍ରଶ୍ନ ମୋର ଅସ୍ତିତ୍ୱର,
    ସ୍ୱର ପ୍ରତିଧ୍ୱନିତ୍ୱ ମୋ କ୍ଷତାକ୍ତ ଭାଵନାର!
    ସତେ କେତେ ନିର୍ଲଜତା ଭରା ତୋ' ନୟନେ,
    ପରିତ୍ୟକ୍ତ ହୋଇଵି ଜାଳୁ ପ୍ରିତୀର ଦୀପ ତୁ ସପନେ!

    କ'ଣ ଭୁଲିଵସିଲୁ ତୋ ଅସ୍ତିତ୍ୱର ସଜ୍ଞା?
    ନା ଆଖି ଲୁହରେ ଲିଭେଇଵସିଲୁ ଅପମାନର ଛିଟା?କେମିତି କହିଵି ମରୁଭୂମି ଲାଗେ ଜୀଵନ,
    ନା ଅଛି ଖୁସି,ନା ଆଖିରେ ଅଛି ସ୍ୱପ୍ନର ସ୍ଥାନ!

    ଆଜି ପ୍ରତାରଣା କରିଯାଇଛି ସମୟ,
    ମୋ ଅସ୍ତିତ୍ୱକୁ ଉପହାସ କରି ସମାଜ କରିଛି ଅନ୍ୟାୟ!ତେଵେ ଦୋଷ କାହାର?
    ପ୍ରତାରକର ନା ପ୍ରତାରିତ ଭରସାର?

    ଆଃ! ବିସ୍ତୀର୍ଣ ପରିସରେ ଜୀବନର, ଦାସ ସବୁ ସ୍ୱlର୍ଥର,
    ମହକେ ବାସ୍ନା ଅସହ୍ୟ,ଅସହ୍ୟତାର। ଦୁର ପାହାଡ଼ ସୁନ୍ଦର।
    ସତେ ଏ ଦୁନିଆ କେତେ କଠୋର, ମରୁ ମରିଚିକା, ଏଠି କେହି ନୁହେଁ କାହାର।। ହଁ, ଏକ ମୃଗତୃଷ୍ନା....!
    ©debabratabiswal

  • debabratabiswal 29w

    लोग गालिब को याद किया करते है
    लोग फैज़ की बातें भी किया करते है
    पर मै हमेशा उस राहत रहत इंदौरी को सुनता रहा जो कभी अपने माँ भारत की बात करता रहा
    कभी अपने प्यार को याद करता रहा
    और कहता रहा
    बुलाती है मगर जाने का नहीं
    ये दुनिया है मेरे बेटे यहाँ आने का नही
    #tributetoRAHATINDORI
    # RIP
    ©debabratabiswal

  • debabratabiswal 45w

    LET HER LIVE

    That little angel with Tiny hands, broad smile sparkling eyes holding dreams to fly high,
    She doesn’t have wings, but she has all the potential to conquer the sky,
    But why she always become victim to conspiracies of people’s eye,
    She has never been the first priority, but she always cherish the moments bestowed with,
    Her eyes are full of dreams, no anguish, no complain, always ready to sacrifice her fantasy,
    Sometimes abandoned, sometimes murdered, sometimes thrown in dump of garbage,
    Let her live, let her bloom, let her shine like a beautiful moon,
    She is not a burden, she will always be your beautiful angel.....
    ©debabratabiswal

  • debabratabiswal 49w

    अच्छा लगता हैं

    भरी दोपहर में
    दुनिया की भीड़ से दूर
    कहीं किसी जगह
    तुमसे मिलना
    अच्छा लगता हैं।
    किसी पेड़ की घनी छाव मे बैठना
    अच्छा लगता है।
    तेरा अपने दुपट्टे को जमी पर
    बिछाना अच्छा लगता हैं।
    ख़ामोश हम दोनों का
    बैठ जाना अच्छा लगता है।
    कहीं दूर उड़ते दो
    पंछियों को निहारना
    अच्छा लगता हैं।
    दबी दबी सी जुबां में
    कोई प्यार भरा तराना गुनगुनाना
    अच्छा लगता हैं।
    मिट्टी पर एक दिल
    बनाकर दो नाम लिखना
    अच्छा लगता हैं।
    गिरे पत्तो पर कुछ लिख कर
    प्यार बयां करना
    अच्छा लगता हैं।
    मुस्कुराते हुए तेरा मुझे पागल कहना
    अच्छा लगता हैं।
    तेरे हाथ की तरफ़ चुपके से
    अपनी दो उंगलियों को सरकाना
    अच्छा लगता हैं।
    उस सन्नाटे में
    तेज़ धड़कते हमारे
    दो दिलों का शोर सुनना
    अच्छा लगता हैं।
    छुपके छुपाके तुम्हे देखकर नज़र चुराना
    अच्छा लगता हैं।
    यूहीं नज़रों नज़रों का
    छुपना छुपाना
    अच्छा लगता है।
    शरमाते हुए तुम्हारा
    कुछ तो कहो कहना
    अच्छा लगता हैं।
    सब कुछ कहने की ठान कर
    मेरा कुछ भी ना कह पाना
    अच्छा लगता हैं।
    इक पल के लिए तुमसे नज़रे मिलाकर
    इक प्यारा सा एहसास जगाना
    अच्छा लगता हैं।
    फ़िर कब मिलोगी पूछने पर तेरा
    मुस्कुराना अच्छा लगता हैं।
    यूहीं तेरे साथ
    दोपहर को शाम करना
    अच्छा लगता हैं।
    ©debabratabiswal

  • debabratabiswal 64w

    अच्छा लगता हैं।

    भरी दोपहर में
    दुनिया की भीड़ से दूर
    कहीं किसी जगह
    तुमसे मिलना
    अच्छा लगता हैं।
    किसी पेड़ की घनी छाव मे बैठना
    अच्छा लगता है।
    तेरा अपने दुपट्टे को जमी पर
    बिछाना अच्छा लगता हैं।
    ख़ामोश हम दोनों का
    बैठ जाना अच्छा लगता है।
    कहीं दूर उड़ते दो
    पंछियों को निहारना
    अच्छा लगता हैं।
    दबी दबी सी जुबां में
    कोई प्यार भरा तराना गुनगुनाना
    अच्छा लगता हैं।
    मिट्टी पर एक दिल
    बनाकर दो नाम लिखना
    अच्छा लगता हैं।
    गिरे पत्तो पर कुछ लिख कर
    प्यार बयां करना
    अच्छा लगता हैं।
    मुस्कुराते हुए तेरा मुझे पागल कहना
    अच्छा लगता हैं।
    तेरे हाथ की तरफ़ चुपके से
    अपनी दो उंगलियों को सरकाना
    अच्छा लगता हैं।
    उस सन्नाटे में
    तेज़ धड़कते हमारे
    दो दिलों का शोर सुनना
    अच्छा लगता हैं।
    छुपके छुपाके तुम्हे देखकर नज़र चुराना
    अच्छा लगता हैं।
    यूहीं नज़रों नज़रों का
    छुपना छुपाना
    अच्छा लगता है।
    शरमाते हुए तुम्हारा
    कुछ तो कहो कहना
    अच्छा लगता हैं।
    सब कुछ कहने की ठान कर
    मेरा कुछ भी ना कह पाना
    अच्छा लगता हैं।
    इक पल के लिए तुमसे नज़रे मिलाकर
    इक प्यारा सा एहसास जगाना
    अच्छा लगता हैं।
    फ़िर कब मिलोगी पूछने पर तेरा
    मुस्कुराना अच्छा लगता हैं।
    यूहीं तेरे साथ
    दोपहर को शाम करना
    अच्छा लगता हैं।

    ©debabratabiswal