deepajoshidhawan

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A Healer to others by profession but write poetry to heal myself.

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Reposts
  • deepajoshidhawan 3h

    पत्थर, छुरे, आगजनी, खून का बदला खून...
    कौन कह सकता है ये इंसान हैं?
    वो दिन दूर नहीं जब जानवर बोल उठेंगे कि
    वो हम इंसानों से लाख गुना बेहतर हैं...

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    वतन सबको जान से प्यारा रहा है आगे भी रहेगा
    मुश्किल वक़्त आता जाता रहा है आगे भी रहेगा

    खून के रंग में फर्क बताया कभी किसी मज़हब ने
    इंसान के इंसान काम आता रहा है आगे भी रहेगा

    डोर बंधी उनके हाथों में जो खुद कभी दिखते नहीं
    इंसान कठपुतली सा नाचता रहा है आगे भी रहेगा

    शतरंज की बिछाई गयी बिसात जैसी है सियासत
    इसमें राजा - वज़ीर बदलता रहा है आगे भी रहेगा

    इंसान हों या जानवर इन्हें आपस में लड़ते देखना
    इन सबका ही शग़ल पुराना रहा है आगे भी रहेगा

    वक़्त काटने भर को बने शह मात के इस खेल में
    पैदल बस हमेशा से पिटता रहा है आगे भी रहेगा
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 1d

    दम घुटने सा लगा है नफ़रत भरी सियासती हवाओं में,,,
    कोई है जो अब घोले मोहब्बत का इत्र इन फिज़ाओं में??
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 2d

    Sincere thanks for your kind repost @mirakee
    and @writersnetwork

    A dream come true for amatuer writer like me.

    DIAMANTE Poem
    Line 1: Beginning subject
    Line 2: Two describing words about line 1
    Line 3: Three doing words about line 1 ending with ing
    Line 4: A short phrase about line 1, A short phrase about line 7
    Line 5: Three doing words line 7
    Line 6: Two describing words about line 7
    Line 7: End subject

    Sun
    Collosal, radiant
    Unswerving, flaming, dazzling,
    Phenomenal absolutely, scarred beauty
    Changing, inspiring, intoxicating
    Calm, Serene
    Moon
    ©deepajoshidhawan

    #poetrywednesday #mirakee @mirakee
    #writersnetwork @writersnetwork

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    Sun
    Collosal, radiant
    Unswerving, flaming, dazzling,
    Phenomenal absolutely, scarred beauty
    Changing, inspiring, intoxicating
    Calm, Serene
    Moon
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 2d

    जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा..
    से शुरू होकर
    हिंदी हैं हमवतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा...
    से होते हुए
    भारत हमको जान से प्यारा है...
    तक
    ये कहाँ आ गए हैं हम???

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    यहाँ किसी को स्वर्ग चाहिए और किसी को जन्नत जाना है,,
    लेकिन दुनिया जहन्नुम कर देने की होड़ में सारा ज़माना है..
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 2d

    #word25feb_wt #writerstolli @writerstolli
    #writersnetwork @writersnetwork
    #mirakee @mirakee


    You can have any ORDINARY house
    Build a love NEST with your spouse

    Kindness defeating everything cruel
    Ego not surviving due to lack of FUEL

    Understand each other without a WORD
    Your bond will appear out of this world

    Gloominess gone amid joy and laughter
    DROP negativity and be happy ever after
    ©deepajoshidhawan

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    Extraordinary Home

    You can have any ORDINARY house
    Build a love NEST with your spouse

    Kindness defeating everything cruel
    Ego not surviving due to lack of FUEL

    Understand each other without a WORD
    Your bond will appear out of this world

    Gloominess gone amid joy and laughter
    DROP negativity and be happy ever after
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 3d

    तू मिले या न मिले, बस तेरी चाहत में मरना है,,
    तुझे हासिल नहीं करना, तुझसे इश्क़ करना है..
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 3d

    तेरे अदब क़ायदों का कद्रदान हूँ ऐ ज़िन्दगी,
    निभे न ग़र रिवाज़ तो पशेमान हूँ ऐ ज़िन्दगी,,
    लाख कोशिशें करता हूँ मात खा ही जाता हूँ,
    पल पल बदलते रुख से हैरान हूँ ऐ ज़िन्दगी..
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 5d

    कुछ यूँ जुदा हुए थे हम.........

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    इश्क़ और ज़माने के बीच, एक जंग जब छिड़ी थी,,
    वो ज़माने के साथ रहा , मैं इश्क़ के साथ खड़ी थी..
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 5d

    दिन निकल ही आया है, हरा कर काली रात को,,
    कहता है आगे की सोचो, जाने दो बीती बात को..
    ©deepajoshidhawan

  • deepajoshidhawan 1w

    नमो शिव शंकर शंभू , नमो रुद्र त्रिपुरारी I
    गरलपान कर व्यथा का , हरें विपदा सारी II
    ©deepajoshidhawan