despicable______meh

www.instagram.com/_geminitwin__7/

Bihar❤️⚡Delhi DU'21|DRC'21 ‘ɪᴛ ɪs ᴡʀɪᴛᴛᴇɴ.` Maktub| Follow Insta.

Grid View
List View
Reposts
  • despicable______meh 2d

    ये भी तुम याद कर लो,
    जिनकी बात हम हरे रंग में करते है तिरंगे के,
    आज उन्हें तुम साथ कर लो।
    किसान है वो, उनको आज़ाद कह लो,
    उनको तुम आज भगत कह लो,
    वो पटेल भी है, वही लोकमान्य है,
    उनको तुम आज सुभाष कह लो।
    सूखी रोटी को गाने वाले, आज तुम,
    उस रोटी को उगाने वाले को याद कर लो।
    आज का गणतंत्र किसान की कह लो,
    आज किसान ज़िंदाबाद कह लो।
    ©despicable______meh

  • despicable______meh 1w

    And goodbye you all.
    I'm no more in need
    and so you are.
    I set you free from my side
    And you have freed too.
    Bye, don't look for me now
    I'm tired enough to ignore you.
    I'm my hater and lover.
    No, not all of you're privileged to be both.
    ©despicable______meh

  • despicable______meh 1w

    Dear Diary, And the nightfall
    the darkness takes me to you
    And here I am to you
    ranting the same thing.

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 1w

    तू आएगा
    हम कहीं तो होंगे
    जहां तू अपनी शरारत
    मैं बेचैनी लेकर रहूंगी
    जहां करवटों सा हम बदलेंगे
    एक खेल हम खेलेंगे
    प्यार यूं टूटेगा की होश ना होगी
    तुम रुक जाओगे तब, और मैं भी
    ना जाने के बहाने करूंगी तुमसे
    तुम थामना मुझे,
    कभी मैं संभालूंगी
    बातें समझ जाओगे तो
    तुम होगे मैं होऊंगी और...
    और, रात सिलवटों में गुजरेगी
    दिन भी होगा तो शर्मा के ढल जाएगा
    चांद कहेगा आज ज़माने को सूरज नहीं चाहिए
    तुम होगे और मैं होऊंगी
    तुम्हारी बाहों में यूंही देखती सुनती
    बात कर रहे होंगे हम
    अगर छोड़ भी गए तुम उस पहर तो...
    याद तुम मिटा ना सकोगे।
    ©despicable______meh

  • despicable______meh 4w

    एक टुकड़ा जो सड़क पर गिरा है आंसू के
    भीगा ना सका तेरे दिल के दीवार को
    मगर यूंही कभी जब तू गुज़रे उधर से
    उस टुकड़े को कुचल कर जाना
    क्यूंकि मेरा वो हिस्सा मेरा नहीं रहा।

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 4w

    गुज़रे वक्त ने भी एक रंग पहना था, 
    रंग भी ऐसा था कि चढ़ा है मुझपे अभी।
    थोड़ा बिखरा है, थोड़ा फिका है
    ये बस ज़िद है उसकी या ना उतारने की मेरी…
    गुज़रे वक्त ने भी एक रंग पहना था !

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 4w

    अब लगता है कि हम चले वहीं
    वहीं रहे, वही बातें करें, रात भर करे
    जब परीक्षा के समय वो syllabus discuss करते थें
    जब स्कूल जाते हुए बस में तुम सब होते थे
    वो दसवीं का दौर था, और अब कॉलेज का शोर है
    भूले नहीं है हम, बस समय अलग है
    मगर एक सवाल है मन में, जवाब आज ढूंढते हैं
    क्या जरूरी था बिछड़ना, क्या जरूरी था हमारा बढ़ना?
    क्या जरूरी था ये 'हम' से 'मै' मेरे लहजे में आना?
    क्या नहीं हो सकता वहीं बचपना फिरसे, बिना फिक्र के तुमसे जुडे़ रहना
    नहीं हमको बडा़ होना है यार, नहीं बनना इतना समझदार
    डरे हुए है हम, खुदेसे ही सहमे हुए है, क्या बोलें हम तुमसे
    क्या बताएं तुमको, क्या सुनोगी, क्या हम कह पाएंगे?
    अब लगता है हमको देर हो गया है
    सब बदल गया है, ना हम वो है, ना हम बन पायेंगे।
    ये 'हम' से 'मैं' का सफर महंगा सा लग रहा है।

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 4w

    ,कुछ लम्हें थी मेरी नादानी के
    उस दौर कि बातें है, तस्वीर है
    मेरी यादें है इनमें सिमटी।
    कुछ भूलना है, कुछ रुला रही है
    कुछ लम्हे थी मेरी नादानी के

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 6w

    खुशियां चल रही थी...
    और लॉक डाउन हो गया।
    अच्छा था कि कुछ परिंदे आजाद हुए मुझसे
    तो कुछ को पिंजरे में इस मर्तबा कैद किया।
    अच्छा हुआ लॉक डाउन हो गया।

    ©despicable______meh

  • despicable______meh 14w

    बातें ज्यादा हुई नहीं,
    आहट लेकर आ गये
    चाय ठंडी हो गई
    गर्माहट लेकर आ गये
    उम्मीद है कि कुछ पल चुनेंगे
    थोड़ी कहेंगे, थोड़ी सुनेंगे
    फिर मिलने की हां होगी
    छटपटाहट लेकर आ गये